SIR में हटे वोटरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची TMC, चुनाव नतीजों पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election) में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान टीएमसी ने दावा किया कि जिन विधानसभा सीटों पर वोटरों के नाम हटाए गए, वहां जीत का अंतर उससे कम था।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने टीएमसी को इस मुद्दे पर नई इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) दाखिल करने की अनुमति दी।

टीएमसी की ओर से वरिष्ठ नेता और वकील कल्याण बंद्योपाध्याय ने अदालत में कहा कि SIR के तहत जिन वोटरों के नाम हटाए गए, उसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ा है।

सुनवाई के दौरान कल्याण बंद्योपाध्याय ने अदालत को बताया कि एक विधानसभा सीट पर उम्मीदवार केवल 862 वोटों से हार गया, जबकि उस क्षेत्र में 5432 से ज्यादा वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे।

उन्होंने दावा किया कि राज्यभर में टीएमसी और बीजेपी के बीच वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था, जबकि करीब 35 लाख अपीलें अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि हटाए गए वोटरों की संख्या और जीत के अंतर में सीधा संबंध है, तो इस पर विस्तृत याचिका दाखिल की जा सकती है।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा,
“आप जो भी कहना चाहते हैं कि हटाए गए वोटरों की वजह से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए, उसके लिए अलग IA दाखिल करनी होगी।”

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने टीएमसी की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इसका उचित समाधान चुनाव याचिका (Election Petition) है, न कि अलग से अदालत में हस्तक्षेप।

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि वर्तमान गति से अपीलों के निपटारे में करीब 4 साल लग सकते हैं। इस पर CJI ने कहा कि अदालत की प्राथमिकता होगी कि लंबित अपीलों पर जल्द फैसला हो।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उचित आवेदन दाखिल होने के बाद मामले की आगे सुनवाई की जाएगी। फिलहाल मामले को स्थगित कर दिया गया है।

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