बहुदलीय लोकतान्त्रिक व्यवस्था के खिलाफ है डबल इंजन की सरकार का सियासी नारा

चार राज्यों बंगाल असम तमिलनाडू और केरला तथा  एक केंद्र शासित राज्य पडुचेरी में चुनाव संपन्न हो गए बंगाल असाम और पडूचेरी  में बीजेपी सफल रही केरला में कांग्रेस तथा तमिल नाडू में फ़िल्मी सितारे विजय की टीवीके पार्टी ने सत्ता रूढ़ DMK को हरा कर पूर्ण बहुमत तो नहीं पाया मगर सब से बड़ी पार्टी बन कर उभरी आशा है कि वह कांग्रेस और AIDMK के साथ मिल कर सत्ता संभालेगी Iबंगाल पर क़ब्ज़े के बाद हरियाणा से ले कर आसाम और पूरे नार्थ ईस्ट पर भगवा झन्डा लहरा गया है I डबल इंजन की सरकार का संघी विचार अमली रूप ले रहा है, भारत के लिए  एक दल एक नेता एक धर्म एक संसकृति और भाषा का जो  खाका संघ ने बनाया था अब उसमें रंग भर रहा है, भले ही यह खाका हमारे  संविधान की मूलभूत धारणा के खिलाफ हो जो  विविधता में एकता पर आधरित है, जो भारत में सभी धर्मो जातियों भाषाओं संस्कृतियों का एक सुंदर मेल है और जिस पर विगत 65-70 साल से भारत अग्रसर था, यही उसकी पहचान थी और इसी कारण भारत दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मिसाल था उसका एक विशेष सम्मान था  I  

अब भारत चीन, उत्तरी कोरिया, रूस ,तुर्किया और अरब देशों की तरह एक दल एक नेता वाले निजाम की ओर अग्रसर है I दक्षिण भारत अभी तक संघ के खाके में फिट नहीं बैठ रहा है मगर कर्नाटक पर उसका कब्जा है ही अन्य राज्य भी देर सबेर आ  ही जायेंगे  I डबल इंजन की सरकार केवल एक रजनैतिक नारा ही नही है यह वास्तव में संविधान की अवधारणा पर हमला है जिसने  देश की विविधता और बहुदलीय व्यवस्था को स्वीकार किया था क्योंकि यही भारत की विवधताओं को समोते हुए देश को एक सूत्र में बांधे रख सकती है I संघ शुरू से ही संविधान विरोधी रहा है संविधान बदलने की उसकी चेष्टा सफल नहीं हो पा रही है तो वह संविधान की आत्मा को ही धीमा जहर दे कर मार रहा है I

वैसे  तो चुनाव पांच राज्यों में  हुआ लेकिन देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर की नज़रें बंगाल के चुनाव पर लगी हुई थीं क्योंकि मुकाबला टक्कर का ही नहीं बल्कि संविधान और संवैधानिक मान्यताओं बनाम “चुनाव और युद्ध में सब जायज़ है” के बीच था I बीजेपी ग्राम सभा से ले कर लोक सभा तक का हर चुनाव हर हाल में जीतना अपन परम कर्तव्य समझती है और  इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है I मुसलमानों के खिलफ घृणा फैलाना तो उसके चुनाव अभियान का सब से मारक हथियार है जो प्रधान मंत्री मोदी से ले कर गाँव गली का मामूली कार्यकर्ता तक खुल कर प्रयोग करता है, क्योंकि उसे किसी कानून का डर नहीं है I

वास्ताविकता यह है कि  आरएसएस आरम्भ से ही मुसलमानों दलितों और महिलाओं को वोट देने के अधिकार का   विरोधी रहा है लेकिन संविधान सभा के हमारे दूर दृष्ट वाले नेताओं के सामने उसकी चली नही और संविधान में हर वयस्क को वोट देने का अधिकार दे कर  एक क्रान्तिकरी निर्णय लिया गया I मगर संविधान लगू होने के बाद ही मुस्लिम वोटों को परिसीमन द्वारा तितर बितर कर के निशप्रभावी करने की साज़िश शुरू हो गयी थी, सच्चर कमिटी ने अपनी  रिपोर्ट में इसका विस्तार से खुलासा किया है I आज भी यह सिलसीला जारी है, बंगाल में 33% असाम में 35% और उत्तर प्रदेश में 20% मुस्लिम वोटों को परिसीमन और  ध्रुवीकरण द्वारा निश्प्र्भावी किया जा चुका है I इसके अलावा बीजेपी हर संभव तरीके से  चुनावी आचार संहिता का खुल कर अचार बनाती है क्योंकि  केचुआ (केंद्रीय चुनाव आयोग ) उसकी मुट्ठी में है और सुप्रीम कोर्ट से भी उसे कोई खतरा नहीं है I याद दिला दें कि इसी चुनाव आयोग ने स्व बाल ठाकरे जैसे दबंग और लोकप्रिय नेता को चुनाव लड़ने के अयोग्य (Defrenchise) घोषित कर दिया था क्योंकि उन्होंने एक चुनाव में धर्म के बुनियाद पर वोट माँगा था और वह चुनाव भी रद्द कर  दिया गया था I अब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी  केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री  योगी  समेत बीजेपी के छोटे बड़े सभी  नेताओं  का चुनाव अभियान घोर साम्प्रदायिक बुनियादों पर चलता है जिसके खिलाफ चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में देश के सैकड़ों प्रबुद्ध नागरिकों की शिकायत पर भी  कोई नोटिस नहीं लिया जाता I इंदिरा गांधी जैसी आयरन लेडी का चुनाव इलाहाबाद हाई कोर्ट से एक मामूली सी टेक्निकल गलती पर रद्द कर दिया गया था I लेकिन वह दौर था जब संवैधानिक संस्थाएं मज़बूत थीं, लोगों में संविधान के प्रति आस्था थी ईमानदारी थी और सब से बड़ी बात लोक लाज का डर था, अब  यह सारे गुण कहने और सुनने भर को रह गए हैं I मोदी ने सब से बड़ी अक्लमंदी यही की कि सभी संवैधानिक संस्थाओं पर शाखाओं से निकले Brain washed लोगों को भर के उनको दंतविहीन ही नही बेशर्म और  बेज़मीर भी कर दिया है  I यहाँ तक कि न्याय पालिका भी इससे अछूती नहीं रह गयी है ऐसे ऐसे निर्णय आते हैं जिन्हें सुन के ही आम आदमी दंग रह जाता है I

बंगाल के चुनाव को ही ले लीजिये 27 लाख लोग वोट देने से वंचित कर दिए गए उनके ममलों की सुनवाई तक नही हुई और सुप्रीम कोर्ट के जज साहब फरमाते हैं कि “ कोई बात नही जो इस बार वोट नही दे पाया वह अगली बार दे लेगा” I सोशल मीडिया की एक पोस्ट से पता चला ही की कनाडा के सुप्रीम कोर्ट ने एक पोस्टल बैलट को गिनती में शामिल न करने पर वह चुनाव ही रद्द कर दिया और हमारे यहाँ 27 लाख लोग मताधिकार से ही वंचित कर दिए गए और सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा वह ऊपर बता ही दिया है I एक  पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने सुप्रीम कोर्ट के उस कमेन्ट की आलोचना करते हुए यहाँ तक कह दिया कि उक्त न्यायाधीश को जनता से माफी मंगनी चाहिए I  मज़े की बात यह है कि जिन लोगों को मताधिकार  से वंचित किया गया उन में से बहुतों को चुनावी ड्यूटी पर लगाया गया था अर्थात वह वोट दे नही  सकते थे मगर वोट दिलवा सकते हैं I  बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस में वोटों में लगभग इतने ही वोटों का अंतर है  जितने वोटर मताधिकार से वंचित किये गये थे ,अर्थात केवल चुनाव आयोग ही नहीं बंगाल चुनाव के इस चीरहरण में सुप्रीम कोर्ट भी बराबर का शरीक  है I वास्तविकता यह है कि मोदी युग में न्यायपलिका के भी नकेल डाल दी गयी ही कोई  जज लोया नही बन्ना चाहेगा  सभी गगोई शिव सुन्द्रम और अब्दुल नजीर आदि बनना चाहते, ईमानदार बन  कर  जान जोखिम मे क्यों डालें ?

बंगाल में चुनाव जिस   प्रकार कराया गया वह अपने आप में एक मिसाल बन गया है, ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ 80 हजार सैनिक उतारे हैं ज्ञानेश कुमार ( वस्तव में मोदी अमित शाह ) ने ममता के खिलाफ ढाई लाख अर्ध सैनिक तैनात  किये I चुनावों में केन्द्रीय बलों का भेजा जाना कोई नई बात नहीं लेकिन यह बल स्थानीय प्रशासन के अधीन होते थे ,ऑब्जरवरों का काम स्थानीय प्रशासन से सहयोग करना और  अगर कोई अनियमितता पाई जये तो उसकी रिपोर्ट चुनाव आयोग को करना होता है लेकिन उत्तर प्रदेश से गये एक अफसर ने TMC के एक उम्मीदवार और उसके समर्थकों को जिस तरह न केवल हडकाया बल्कि अपमानित किया वह बानगी भर है और  अपने आप में बहुत कुछ कहता है I एक वरिष्ट पुलिस अधिकरी विभूति नारायण राय ने एक टी वी डिबेट में उस अफसर की इस हरकत की कटु आलोचना की है एक अन्य रिटायर्ड अफसर  अशीश जोशी ने तो चुनाव आयोग को पत्र लिख कर उक्त अफसर के आचरण को गलत बताया लेकिन मोदी के भारत में यह सब नार्मल हो चुका है सत्ता जो चाहे और  जो करे सब सही है I

चुनाव दर चुनाव जिस प्रकार असंवैधानिकता,साम्प्रदायिकता, अनैतिकता और हिंसा एक योजनाबद्ध तरीके से बढ़ाई जा रही है वह देश के लिए एक बहुत बड़े खतरे की घंटी है Iभारत को नाजी जर्मनी और मार्शल टिटो के बाद के युगोस्लाविया के रास्ते पर ले जाया जा रहा है, भारत इन देशों के अंजाम को न पहुंचे यही प्रार्थना है I

( डिस्क्लेमर : लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और यह उनका निजी मत है, जुबिली पोस्ट का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं है )

Related Articles

Back to top button