कोलकाता पुलिस ने ममता को किया ‘Unfollow’, अब मोदी-शाह के निर्देशों पर चलेगी वर्दी?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की धमक अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी सुनाई देने लगी है。 विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के साथ ही राज्य का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है।इसका सबसे बड़ा प्रमाण कोलकाता पुलिस के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर देखने को मिला है, जिसने अपनी वफादारी के संकेत देने शुरू कर दिए हैं।
डिजिटल स्ट्राइक: पूर्व सीएम ममता और अभिषेक बनर्जी लिस्ट से बाहर
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैसे ही मतगणना के रुझानों ने बीजेपी की जीत पर मुहर लगाई, कोलकाता पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाया।
- अनफॉलो किया: पुलिस हैंडल ने अपनी ‘फॉलोइंग’ लिस्ट से राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी को हटा दिया है।
- नए फॉलोअर्स: अब कोलकाता पुलिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आधिकारिक हैंडल्स को फॉलो कर रही है।
विशेषज्ञ इसे नई सरकार के शपथ ग्रहण से पहले ही केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बिठाने की एक सोची-समझी प्रशासनिक कवायद के रूप में देख रहे हैं।
जमीन पर भी बदला सुरक्षा का घेरा
डिजिटल एक्टिविटी के साथ-साथ राज्य के ‘VIP’ सुरक्षा प्रोटोकॉल में भी नाटकीय बदलाव देखने को मिल रहे हैं…
- सुरक्षा में कटौती: ममता बनर्जी के कालीघाट आवास और अभिषेक बनर्जी के दफ्तर के बाहर से अतिरिक्त पुलिस बल हटा लिया गया है।
- बैरिकेड्स हटे: भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल इलाकों से सुरक्षा बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं।
- VIP स्टेटस खत्म: सत्ता हाथ से जाते ही अब टीएमसी नेताओं के पास पहले जैसी अभेद्य सुरक्षा नहीं रही।
अवसरवादिता या सरकारी प्रोटोकॉल?
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह एक तकनीकी प्रक्रिया है क्योंकि ममता बनर्जी अब पूर्व मुख्यमंत्री की श्रेणी में आ चुकी हैं。 हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस पर बहस छिड़ गई है…
- विपक्ष का आरोप: टीएमसी समर्थकों ने इसे पुलिस का ‘डर’ और ‘सत्ता के प्रति समर्पण’ करार दिया है。
- भाजपा का पक्ष: भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह ‘भयमुक्त प्रशासन’ और ‘सच्चे लोकतंत्र’ की शुरुआत है。
निष्कर्ष: नए प्रशासनिक युग की आहट
2026 के नतीजों ने बंगाल के 10 साल पुराने टीएमसी शासन का अंत कर दिया है। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा की इस जीत ने राज्य के पूरे प्रशासनिक ढांचे को झकझोर दिया है। कोलकाता पुलिस का यह डिजिटल कदम महज एक शुरुआत है; आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल के शासन और प्रशासन में और भी बड़े फेरबदल की उम्मीद है।


