Energy Security: भारत को भू-तापीय ऊर्जा और प्राकृतिक हाइड्रोजन पर बढ़ाना होगा फोकस

वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए नए विकल्पों पर तेजी से काम करना होगा।
MIT World Peace University (MIT-WPU) के वार्षिक सम्मेलन मैग्मा 2026 में विशेषज्ञों ने कहा कि भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) और प्राकृतिक हाइड्रोजन (Natural Hydrogen) भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।
सिर्फ सौर-पवन नहीं, चाहिए बेसलोड एनर्जी
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा मजबूती केवल सौर और पवन ऊर्जा से संभव नहीं है।
भू-तापीय ऊर्जा जैसे बेसलोड स्रोत 24×7 बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकते हैं और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
भारत में भू-तापीय ऊर्जा की संभावित क्षमता 10 गीगावाट से अधिक आंकी गई है।
मैग्मा 2026 में वैश्विक भागीदारी
इस 5-दिवसीय सम्मेलन में 16 से अधिक संगठनों ने भाग लिया, जिनमें
- Geological Survey of India
- IITs और IISER
- Council of Scientific and Industrial Research (CSIR)
- Halliburton
- Thermax
जैसे प्रमुख संस्थान और कंपनियां शामिल रहीं।
पुगा वैली में ड्रिलिंग, भारत की नई उम्मीद
Seros Energy इस समय पुगा घाटी (लद्दाख) में भू-तापीय कुओं की ड्रिलिंग कर रही है, जो भारत के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
AI और डेटा से बढ़ेगी सफलता दर
विशेषज्ञों ने कहा कि
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- मशीन लर्निंग
- उन्नत डेटा एनालिटिक्स
जैसी तकनीकें भू-तापीय और हाइड्रोजन खोज की अनिश्चितता को कम कर सकती हैं और परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बना सकती हैं।
क्या बोले विशेषज्ञ
डॉ. आशीष अग्रवाल (MD & CEO, Seros Energy) ने कहा👉 “ऊर्जा सुरक्षा के लिए भू-तापीय ऊर्जा का विकास बेहद जरूरी है।”
डॉ. प्रकाश कुमार (निदेशक, NGRI-CSIR) ने बताया कि उन्नत भूभौतिकी तकनीकें संसाधनों की सटीक पहचान में मदद कर रही हैं।
डॉ. शालिवाहन (निदेशक, IIPE) ने कहा: “भू-तापीय ऊर्जा तुरंत मुख्य स्रोत नहीं बनेगी, लेकिन ऊर्जा मिश्रण में रणनीतिक भूमिका निभाएगी।”
प्राकृतिक हाइड्रोजन: भविष्य का बड़ा विकल्प
सम्मेलन में प्राकृतिक हाइड्रोजन को भी एक उभरते हुए सस्ते और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में बताया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पारंपरिक हाइड्रोजन उत्पादन से कम लागत में उपलब्ध हो सकता है और वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य बदल सकता है।
भारत के लिए क्या है संदेश?
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए विविध ऊर्जा स्रोत जरूरी
- घरेलू खोज और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर
- नीति, उद्योग और शिक्षा के बीच सहयोग अनिवार्य



