सोशल मीडिया के जरिए ‘टारगेट’ बन रहे युवा: यूपी ATS ने संदिग्ध मॉड्यूल का किया भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर बड़ी साजिश को नाकाम करने का दावा किया है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब आतंकी नेटवर्क सीधे हथियारों से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जिन पर विदेशी नेटवर्क से जुड़े होने और संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाने की साजिश रचने का आरोप है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों आरोपी कथित तौर पर ऐसे स्थानों को टारगेट करने की योजना बना रहे थे, जहां आर्थिक गतिविधियां ज्यादा होती हैं-जैसे मॉल और इंडस्ट्रियल एरिया।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के टारगेट चुनने का मकसद सिर्फ नुकसान पहुंचाना ही नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर दहशत फैलाना भी होता है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्धों का संपर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए विदेशी नेटवर्क से हुआ।
फर्जी प्रोफाइल के माध्यम से बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे उन्हें कथित तौर पर बड़े ऑपरेशन का हिस्सा बनने के लिए तैयार किया गया।

खास बात यह है कि बातचीत के लिए VOIP कॉल और एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल किया जा रहा था, ताकि ट्रैकिंग से बचा जा सके।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को पहले तुरंत नकद रकम और बाद में बड़ी राशि देने का वादा किया गया था।
साथ ही उन्हें हथियार मुहैया कराने की बात भी कही गई थी, जिससे यह संकेत मिलता है कि साजिश को अंजाम देने की तैयारी गंभीर स्तर पर थी।

जेंसियां इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि क्या आरोपियों के तार अन्य संगठनों से जुड़े हुए हैं।
Tehrik-e-Taliban Hindustan से संभावित संपर्क की बात भी जांच के दायरे में है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।

करीब एक महीने पहले भी उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ने एक अन्य मॉड्यूल का खुलासा किया था, जिसमें भी सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़कर संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही थी।इससे यह संकेत मिलता है कि ऐसे नेटवर्क लगातार नए तरीकों से सक्रिय रहने की कोशिश कर रहे हैं।

यह पूरा मामला इस ओर इशारा करता है कि सुरक्षा के खतरे अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ चुके हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को टारगेट करना एक नई चुनौती बनती जा रही है, जिस पर एजेंसियां खास नजर रख रही हैं।

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