US-Iran War Ceasefire: युद्ध तो थमा पर अमेरिका में मचा ‘सियासी कोहराम’, क्या ट्रंप की कुर्सी जाएगी?

वॉशिंगटन: ईरान के साथ 40 दिनों की भीषण जंग के बाद युद्ध-विराम (Ceasefire) का ऐलान तो हो गया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां ईरान में जश्न का माहौल है, वहीं अमेरिका में ट्रंप को पद से हटाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। एक्सिओस (Axios) की रिपोर्ट के मुताबिक, 85 से ज्यादा डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

ट्रंप पर ’25वें संशोधन’ की तलवार: क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी संसद (Congress) में राष्ट्रपति ट्रंप के मानसिक स्वास्थ्य और उनके हालिया व्यवहार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सांसदों का तर्क है कि युद्ध के दौरान ट्रंप की पल-पल बदलती रणनीति और सोशल मीडिया पर उनकी “विवादित भाषा” यह संकेत देती है कि वे देश का नेतृत्व करने के लिए सक्षम नहीं हैं।

क्यों उठी ट्रंप को हटाने की मांग?

  1. विवादित सोशल मीडिया पोस्ट: ईस्टर के मौके पर ट्रंप द्वारा की गई ‘गाली-गलौज’ भरी पोस्ट ने आग में घी डालने का काम किया है।
  2. मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल: सांसदों का कहना है कि युद्ध जैसे गंभीर मुद्दे पर ट्रंप का बार-बार बयान बदलना उनकी अस्थिरता को दर्शाता है।
  3. एप्सटीन फाइल्स का साया: अमेरिका में यह नैरेटिव भी मजबूत हो रहा है कि ट्रंप ने ‘एप्सटीन फाइल्स’ से जुड़े विवादों से ध्यान भटकाने के लिए यह युद्ध छेड़ा था।

क्या है 25वां संशोधन और इसकी ‘धारा 4’?

अमेरिकी संविधान का 25वां संशोधन राष्ट्रपति को पद से हटाने की प्रक्रिया को परिभाषित करता है। प्रदर्शनकारी सांसद धारा 4 (Section 4) को लागू करने की मांग कर रहे हैं:

  • शक्ति: इसके तहत उपराष्ट्रपति और कैबिनेट का बहुमत (15 में से 8 सदस्य) लिखित रूप में घोषित कर सकते हैं कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ हैं।
  • परिणाम: घोषणा के तुरंत बाद उपराष्ट्रपति ‘एक्टिंग प्रेसिडेंट’ बन जाता है।
  • चुनौती: यदि राष्ट्रपति खुद को फिट बताते हैं, तो 4 दिनों के भीतर कैबिनेट और उपराष्ट्रपति को कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत से अपनी बात साबित करनी होती है।

युद्ध का कड़वा सच: क्यों बातचीत की मेज पर आए ट्रंप?

28 फरवरी को जब युद्ध शुरू हुआ, तो ट्रंप को वेनेजुएला जैसी आसान जीत की उम्मीद थी। लेकिन 6 हफ्तों के भीतर ही समीकरण बदल गए:

  • आर्थिक दबाव: युद्ध के कारण अमेरिकी इकोनॉमी पर बुरा असर पड़ने लगा।
  • राजनीतिक साख: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप की साख दांव पर लग गई थी।
  • ईरान का प्रतिरोध: ईरान के पास खोने को ज्यादा कुछ नहीं था, जिससे युद्ध लंबा खिंचता जा रहा था।

अंततः, दोनों देशों ने थक-हारकर सीजफायर और वार्ता के लिए हामी भरी है।

आगे क्या?

अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी उपराष्ट्रपति और रिपब्लिकन सांसदों पर हैं। क्या वे डेमोक्रेट्स की मांग का समर्थन करेंगे? यदि 25वां संशोधन लागू होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना होगी। फिलहाल, ईरान के साथ युद्ध-विराम ने सीमा पर शांति तो दी है, लेकिन वॉशिंगटन के गलियारों में जंग अभी शुरू हुई है।

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