बीयर पार्टियों तक पहुँच रही हैं ईरान युद्ध की आग

जुबिली न्यूज डेस्क
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव की चिंगारी अब भारत की गर्मियों वाली बीयर पार्टियों तक पहुंच गई है। होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते संघर्ष और ईरानी हमलों से कतर की गैस सप्लाई बाधित होने के कारण भारत में प्राकृतिक गैस की कमी गहरा गई है। नतीजा — बीयर बनाने वाली कंपनियों की लागत आसमान छू रही है और अब कीमतों में 12 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की तैयारी चल रही है।
ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BIA) ने साफ चेतावनी दी है कि गैस की कमी से कांच की बोतलों की कीमतें पहले ही करीब 20 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। पेपर कार्टन की दरें दोगुनी हो गई हैं, जबकि लेबल, टेप और अन्य पैकेजिंग सामग्री भी महंगी पड़ रही है। शिपिंग में देरी के कारण एल्युमीनियम कैन के लिए जरूरी कच्चा माल भी प्रभावित हो रहा है।
BIA के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी ने कहा, “हम सदस्य कंपनियों से 12-15 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हमने उन्हें सलाह दी है कि वे अलग-अलग राज्यों के साथ बातचीत करें। बढ़ती उत्पादन लागत अब कई ऑपरेशंस को टिकाऊ नहीं रख रही है।”
युद्ध ने कैसे बिगाड़ा बीयर का गणित?
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग 40 प्रतिशत जरूरत कतर से पूरी करता है। ईरान के हमलों से कतर की निर्यात क्षमता आंशिक रूप से प्रभावित हुई है, जिससे ग्लास फैक्टरियों के भट्टियों में गैस की कमी हो गई। कई प्लांट्स आंशिक रूप से बंद या कम क्षमता पर चल रहे हैं।
इसके अलावा, होर्मुज क्षेत्र में तनाव के कारण शिपिंग रूट प्रभावित होने से एल्युमीनियम और अन्य पैकेजिंग मटेरियल की आपूर्ति में देरी हो रही है। ठीक उसी समय जब देश गर्मियों के पीक सीजन में प्रवेश कर रहा है — जब बीयर की मांग सबसे ज्यादा होती है — लागत का यह बोझ कंपनियों पर पड़ रहा है।
यह चेतावनी हैनेकेन, एबी इनबीव (बुडवाइजर) और कार्ल्सबर्ग जैसी बड़ी वैश्विक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन की ओर से आई है।
उपभोक्ताओं पर क्या असर?
- एक औसत 500 ml बीयर बोतल पर 15 से 30 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
- प्रीमियम और इंपोर्टेड ब्रांड्स पर असर और ज्यादा देखने को मिल सकता है।
- कुछ राज्यों में सख्त मूल्य नियंत्रण के कारण सप्लाई की कमी भी हो सकती है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर राज्य सरकारें जल्द एक्साइज ड्यूटी में राहत नहीं देतीं, तो गर्मियों में बीयर की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।
बाजार का भविष्य
भारत में बीयर बाजार तेजी से बढ़ रहा है। शहरी युवाओं की बढ़ती पसंद और डिस्पोजेबल इनकम के कारण यह सेक्टर 2030 तक और बड़ा होने की राह पर है। लेकिन इस बार युद्ध की वजह से गर्मियों की ठंडी बीयर थोड़ी ‘गरम’ पड़ने वाली है।
अभी के लिए सलाह: अगर आपकी पार्टी प्लान है तो जल्दी स्टॉक कर लें, वरना अगले कुछ हफ्तों में जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
यह युद्ध कितना लंबा चलेगा, यह तय करेगा कि आपकी अगली चिल्ड बीयर कितनी महंगी होगी। फिलहाल, ईरान की दूर की आग भारत के बार और ठेके तक साफ महसूस हो रही है।



