जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें मुगल शासक बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक ढांचे के निर्माण/नामकरण पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति Vikram Nath और न्यायमूर्ति Sandeep Mehta की पीठ ने मामले पर सुनवाई की इच्छा नहीं जताई। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने याचिका वापस ले ली।
याचिका में क्या कहा गया था?
याचिका में तर्क दिया गया था कि बाबर एक “हिंदू विरोधी आक्रमणकारी” था, इसलिए उसके या बाबरी मस्जिद के नाम पर भारत में कहीं भी मस्जिद का निर्माण न होने दिया जाए। संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद पीठ ने मामले को खारिज कर दिया।
मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ की प्रतिकृति का जिक्र
सुनवाई के दौरान वकील ने निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक Humayun Kabir द्वारा पश्चिम बंगाल के Murshidabad जिले में ‘बाबरी मस्जिद’ की प्रतिकृति बनाने की घोषणा का हवाला दिया।
कबीर ने 6 दिसंबर 2025 को कथित तौर पर मस्जिद निर्माण की नींव रखते हुए कहा था कि “कोई एक ईंट भी नहीं हिला सकता,” और इसे पूजा स्थलों के निर्माण के संवैधानिक अधिकार से जोड़ा।
‘कोई भी मस्जिद बना सकता है’
हुमायूं कबीर ने कहा कि जैसे कोई भी मंदिर या चर्च बना सकता है, वैसे ही मस्जिद भी बनाई जा सकती है। उन्होंने दावा किया कि कानूनी चुनौतियां निर्माण में बाधा नहीं डालेंगी और उनके खिलाफ दर्ज मामलों के बावजूद वे पीछे नहीं हटेंगे।सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हुई सुनवाई में यह भी रेखांकित किया गया कि भारतीय संविधान धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
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क्या है कानूनी स्थिति?
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद स्पष्ट है कि शीर्ष अदालत ने इस स्तर पर किसी सामान्य प्रतिबंध के निर्देश देने से परहेज किया है। फिलहाल, याचिका वापस लिए जाने के साथ मामला वहीं समाप्त हो गया है।
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