जुबिली न्यूज डेस्क
मुंबई: भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कहा है कि वह फिलहाल यह नहीं बता सकते कि भारत कब लौटेंगे। उनके वकील अमित देसाई ने अदालत को बताया कि माल्या पर यूके में कानूनी प्रतिबंध हैं और उनका पासपोर्ट 2016 में रद्द कर दिया गया था, इसलिए उनके पास कोई सक्रिय यात्रा दस्तावेज नहीं है।

यह बयान उस समय आया है जब बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और जस्टिस गौतम अंखड की खंडपीठ ने पिछली सुनवाई में स्पष्ट किया था कि जब तक माल्या भारत वापस नहीं आते, तब तक उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने माल्या से उनके भारत लौटने के इरादे पर स्पष्ट रुख मांगा था।
दो याचिकाएं दायर
2016 से यूके में रह रहे माल्या ने हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की हैं।
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पहली याचिका में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश को चुनौती दी गई है।
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दूसरी में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) की वैधता पर सवाल उठाया गया है।
माल्या पर बैंकों के हजारों करोड़ रुपये के लोन डिफॉल्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
“वापसी की पक्की तारीख नहीं”
अदालत में दिए अपने बयान में माल्या ने कहा, “मैं अपनी वापसी की कोई पक्की तारीख नहीं बता सकता। मेरा भारतीय पासपोर्ट 2016 में रद्द कर दिया गया था और इंग्लैंड व वेल्स की अदालतों के आदेशों के कारण मैं वहां से बाहर नहीं जा सकता।”
उनके वकील ने दलील दी कि माल्या को इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने, किसी अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन करने या उसे रखने की अनुमति नहीं है। ऐसे में यह कहना संभव नहीं कि वह भारत कब लौटेंगे।
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वकील ने यह भी तर्क दिया कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने और संबंधित कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए माल्या की भारत में भौतिक उपस्थिति अनिवार्य नहीं होनी चाहिए।अब देखना होगा कि हाई कोर्ट इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है और क्या माल्या की याचिकाओं पर सुनवाई आगे बढ़ती है या नहीं।
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