Tuesday - 17 February 2026 - 4:37 PM

सोशल मीडिया पर उम्र की सीमा तय करने पर विचार, टेक कंपनियों से सरकार की चर्चा

जुबिली न्यूज डेस्क

नई दिल्ली। केंद्र सरकार सोशल मीडिया के उपयोग पर उम्र आधारित सीमाएं तय करने को लेकर टेक कंपनियों से चर्चा कर रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार अलग-अलग आयु वर्ग के लिए संभावित एक्सेस लिमिट पर विचार कर रही है, ताकि कम उम्र के यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालांकि अभी तक कोई अंतिम नियम या न्यूनतम उम्र तय नहीं की गई है। उन्होंने ये बातें IndiaAIImpactSummit के दौरान भारत मंडपम में कहीं।

इंडस्ट्री, एकेडेमिया और सरकार मिलकर करेंगे काम

वैष्णव ने कहा कि आईटी इंडस्ट्री भारत की बड़ी ताकत है और हर टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन को इंडस्ट्री, एकेडेमिया और सरकार के तालमेल से संभालना होगा।

सरकार फिलहाल तीन प्रमुख मोर्चों पर काम कर रही है:

  1. मौजूदा वर्कफोर्स की रीस्किलिंग और अपस्किलिंग

  2. नई टैलेंट पाइपलाइन तैयार करना

  3. अगली पीढ़ी को नई टेक्नोलॉजी के लिए तैयार करना

उन्होंने बताया कि 100 से अधिक कॉलेजों में आईटी इंडस्ट्री टैलेंट को अपस्किल कर रही है।

AI स्टैक में 200 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश की संभावना

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, आने वाले दो वर्षों में AI स्टैक की पांचों लेयर में 200 बिलियन डॉलर से अधिक निवेश देखने को मिल सकता है। वेंचर कैपिटलिस्ट्स (VCs) डीप-टेक स्टार्टअप्स, बड़े AI एप्लिकेशन्स और कटिंग-एज मॉडल्स में निवेश कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि AI का अगला स्तर इंजीनियरिंग और मैथमेटिकल इनोवेशन के मेल से आएगा।

क्लीन एनर्जी में भारत की बढ़त

वैष्णव ने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में है जहां 50% से ज्यादा पावर जेनरेशन कैपेसिटी क्लीन सोर्स से आती है। वर्तमान में 51% बिजली उत्पादन स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से हो रहा है, जो भारत के लिए बड़ा रणनीतिक लाभ है।

सेमीकंडक्टर और सॉवरेन AI पर जोर

मंत्री ने बताया कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन AI-ड्रिवन एडवांसमेंट से जुड़ा है और अगले चरण में चिप डिजाइन पर विशेष फोकस रहेगा।उन्होंने ‘सॉवरेन AI’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि भारत को अपने AI मॉडल, चिप्स और इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने होंगे, ताकि रणनीतिक जरूरतों के लिए बाहरी निर्भरता कम हो सके।

सोशल मीडिया कंपनियों को कानून का पालन करना होगा

वैष्णव ने कहा कि Netflix, YouTube, Meta और X जैसी कंपनियों को भारत के संवैधानिक और कानूनी दायरे में काम करना चाहिए।उन्होंने कहा कि हर देश का सांस्कृतिक संदर्भ अलग होता है, इसलिए कंपनियों को स्थानीय नियमों और संवेदनशीलताओं का सम्मान करना चाहिए।

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डीपफेक और बच्चों की सुरक्षा पर सख्ती

केंद्रीय मंत्री ने डीपफेक के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई और कहा कि इसके लिए मजबूत रेगुलेशन की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री और संसदीय समितियों के साथ चर्चा जारी है, ताकि बच्चों और समाज की सुरक्षा के लिए ठोस कानूनी उपाय किए जा सकें।

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