Sunday - 15 February 2026 - 10:13 AM

Maha Shivaratri 2026: आज जल कब चढ़ाएं? जानें जलाभिषेक का सटीक समय और चार प्रहर पूजा मुहूर्त

जुबिली स्पेशल डेस्क

भगवान शिव की उपासना का महान पर्व महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जा रहा है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आने वाली यह पावन रात्रि शिवभक्तों के लिए अत्यंत खास होती है। मान्यता है कि इसी दिव्य रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।

आइए जानते हैं 15 फरवरी 2026 को जल चढ़ाने का सही समय, निशिता काल और चार प्रहर पूजा का मुहूर्त।🔱 महाशिवरात्रि 2026 जलाभिषेक का मुख्य समय (निशिता काल)

महाशिवरात्रि की रात्रि में निशिता काल को सबसे शुभ समय माना जाता है। यह मध्यरात्रि का विशेष मुहूर्त होता है, जिसमें शिवपूजन करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

निशिता काल (मुख्य पूजा समय):
16 फरवरी 2026 को रात्रि 12:09 बजे से 01:01 बजे तक

इस समय शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, शहद, पंचामृत और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ रहेगा। यदि संभव हो तो इसी दौरान जलाभिषेक करें।

 महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजा समय

महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक प्रहर में जल या दूध अर्पित करने का विशेष महत्व है।

  • प्रथम प्रहर:
    15 फरवरी, शाम 06:11 बजे से रात 09:23 बजे तक
  • द्वितीय प्रहर:
    15 फरवरी, रात 09:23 बजे से 16 फरवरी, 12:35 बजे तक
  • तृतीय प्रहर:
    16 फरवरी, रात 12:35 बजे से 03:47 बजे तक
  • चतुर्थ प्रहर:
    16 फरवरी, प्रातः 03:47 बजे से 06:59 बजे तक
  • भक्त अपनी सुविधा अनुसार किसी भी प्रहर में जलाभिषेक कर सकते हैं। जो साधक पूरी रात जागरण करते हैं, वे चारों प्रहरों में अलग-अलग सामग्री से अभिषेक करते हैं।

महाशिवरात्रि पर जल कैसे चढ़ाएं?

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करें।
  • शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल या गंगाजल अर्पित करें।
  • इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद चंदन और भस्म अर्पित करें।
  • अंत में ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।

 जलाभिषेक सामग्री सूची

पूजा थाली में ये सामग्री अवश्य रखें

शुद्ध जल या गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत), बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद चंदन, भस्म, अक्षत (चावल), सफेद फूल, फल, नारियल, सुपारी, लौंग-इलायची, धूप-दीप, रुई की बाती और प्रसाद।
तांबे या पीतल के लोटे में जल भरकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें।

इस वर्ष 15 फरवरी की महाशिवरात्रि विशेष संयोगों के कारण और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। श्रद्धा और सही मुहूर्त में किए गए जलाभिषेक से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

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