जुबिली स्पेशल डेस्क
Rahul Gandhi ने शनिवार को सेना के पूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “जनसंसद में भारत के पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत हुई।
उनकी पीड़ा सुनकर मन व्यथित है। जब कोई जवान देश के लिए अपना शरीर और जीवन दांव पर लगाता है, तो उसकी सेहत और सम्मान की जिम्मेदारी देश की होती है। हर सरकार ने इस कर्तव्य को निभाया, लेकिन मौजूदा मोदी सरकार ऐसा करने में विफल रही है।”
राहुल गांधी ने दो मुद्दों का विशेष रूप से उल्लेख किया-ईसीएचएस और विकलांगता पेंशन।
पहला मुद्दा एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) से जुड़ा है। उनका आरोप है कि इस योजना को जानबूझकर फंड की कमी में रखा गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार अस्पतालों का भुगतान 9-9 महीने तक लंबित रखती है और कम राशि देने के तरीके अपनाए जा रहे हैं।उनके मुताबिक, पिछले 3-4 वर्षों का करीब 12 हजार करोड़ रुपये बकाया है। भुगतान में देरी के कारण कई अस्पताल इस योजना से बाहर हो रहे हैं, जिससे लाखों पूर्व सैनिकों के इलाज पर असर पड़ रहा है। गंभीर बीमारियों, जैसे कैंसर से जूझ रहे पूर्व सैनिकों को भी समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
दूसरा मुद्दा विकलांगता पेंशन पर कर लगाए जाने से संबंधित है। राहुल गांधी ने कहा कि 1922 से लेकर आजादी के बाद तक किसी भी सरकार ने युद्ध में घायल सैनिकों की विकलांगता पेंशन पर आयकर नहीं लगाया।
उनका आरोप है कि पहली बार इस परंपरा को मौजूदा सरकार ने तोड़ा है। बजट में यह प्रावधान किया गया है कि लड़ाई में घायल होकर सेवा जारी रखने वाले पूर्व सैनिकों से भी टैक्स वसूला जाएगा। उन्होंने इसे उन सैनिकों के साथ अन्याय बताया, जिन्होंने देश की सेवा में गंभीर चोटें झेली हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि ये फैसले केवल वित्तीय नहीं, बल्कि नैतिक पतन को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, जो सरकार देशभक्ति की बात करती है, वही सैनिकों की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है।
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