जुबिली स्पेशल डेस्क
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के माहौल में इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन पहुंच गए हैं। उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।
बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों पर नियंत्रण और क्षेत्र में सक्रिय ईरान समर्थित संगठनों को मिलने वाले समर्थन जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
नेतन्याहू के दौरे के साथ ही अमेरिका ने सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले से तैनात USS Abraham Lincoln स्ट्राइक ग्रुप के अलावा ईरान के पास एक और एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजने की तैयारी है।
इस बेड़े में फाइटर जेट, टॉमहॉक मिसाइलें और कई युद्धपोत शामिल हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर दूसरा बेड़ा भी भेजा जा सकता है। इसे क्षेत्र में सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

इज़रायल की चिंता और रणनीति
इज़रायल लंबे समय से चाहता है कि ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते में केवल परमाणु कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय नेटवर्क को भी शामिल किया जाए। इज़रायल को आशंका है कि ईरान की परमाणु गतिविधियां उसके लिए सीधा सुरक्षा खतरा हैं।
कूटनीति और सैन्य दबाव साथ-साथ
सैन्य तैयारियों के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। हाल ही में ओमान में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच जून में हुए तनाव के बाद पहली सीधी वार्ता हुई।
ट्रंप ने संकेत दिया है कि बातचीत का दूसरा दौर जल्द हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका कड़ा कदम उठा सकता है। ट्रंप का दावा है कि इस बार ईरान बातचीत को गंभीरता से ले रहा है।
तेहरान का स्पष्ट रुख
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर ही चर्चा करेगा और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। हालांकि, उसने यह भी संकेत दिया है कि यदि अमेरिका सभी प्रतिबंध हटा ले, तो वह यूरेनियम संवर्धन को 60 फीसदी तक सीमित करने पर विचार कर सकता है।
ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली लारिजानी ने ओमान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर इज़रायल की भूमिका को ‘उकसाने वाली’ बताया और अमेरिका को सतर्क रहने की नसीहत दी।
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए अमेरिका ने अपने झंडे वाले वाणिज्यिक जहाजों को ईरानी जलक्षेत्र से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में सैन्य सतर्कता का स्तर बढ़ चुका है।
फिलहाल स्थिति दो राहों पर खड़ी नजर आ रही है—एक ओर बातचीत के जरिए समाधान की कोशिशें हैं, तो दूसरी ओर सैन्य दबाव का इजाफा। आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा कि अमेरिका और ईरान समझौते की ओर बढ़ते हैं या टकराव की दिशा में।
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