जुबिली न्यूज डेस्क
लखनऊ। विधान परिषद में आज आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर मामला उठाया गया। भाजपा एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने नियम 115 के अंतर्गत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जा रही ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) कटौती की राशि कर्मचारियों के खातों में नियमित रूप से जमा कराए जाने की सुनिश्चित व्यवस्था करने की मांग की।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए मुख्यमंत्री का संवेदनशील फैसला
राज्य में आउटसोर्सिंग के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आउटसोर्सिंग सेवा निगम बनाए जाने के निर्णय की प्रदेशभर में सराहना हो रही है। यह फैसला पिछली सरकारों के दौरान हो रहे शोषण पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
वेतन से कट रहा EPF, खातों में नहीं पहुंच रही रकम
हालांकि, इस सकारात्मक पहल के बीच राज्य के कई हिस्सों से यह चिंताजनक जानकारी सामने आ रही है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ की कटौती तो नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन वह राशि कर्मचारियों के ईपीएफ खातों में जमा नहीं हो रही है।इस स्थिति को लेकर कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और जगह-जगह शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं।
ठेकेदारों पर दोषारोपण, समस्या जस की तस
कर्मचारियों का आरोप है कि जब वे अपनी शिकायतें संबंधित विभागाध्यक्षों के पास ले जाते हैं तो अधिकारी ठेकेदारों और सेवा प्रदाता कंपनियों पर जिम्मेदारी डालकर मामले को टाल देते हैं। कई जगहों पर आंदोलन की स्थिति बन चुकी है, वहीं कुछ मामलों में ठेकेदारों को हटाने का फैसला भी लिया गया है, लेकिन कर्मचारियों की मूल समस्या अब भी बनी हुई है।
कई नगर निगमों से आई शिकायतें
बरेली, गाजियाबाद, आगरा, कानपुर, वाराणसी सहित कई नगर निगमों में इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं।
लखनऊ नगर निगम में तो कर्मचारियों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी ईपीएफ राशि को एजेंसी, ठेकेदार और कुछ अधिकारी आपसी मिलीभगत से हड़प रहे हैं।
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सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
इस लोक महत्व के गंभीर और तत्कालिक विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए भाजपा एमएलसी विजय बहादुर पाठक ने मांग की कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन से की जा रही ईपीएफ कटौती की राशि को हर हाल में कर्मचारियों के खातों में जमा कराने की पारदर्शी और सख्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि कर्मचारियों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो।
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