बजट सत्र में कांग्रेस का आक्रामक रुख, राज्यसभा में हंगामे की पूरी तैयारी

जुबिली स्पेशल डेस्क
बजट सत्र के दौरान कांग्रेस सरकार को हर मोर्चे पर घेरने में जुटी है, जिसके चलते संसद के दोनों सदनों में लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है।
भारी शोर-शराबे के कारण बुधवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री गुरुवार दोपहर तीन बजे राज्यसभा में बोल सकते हैं, लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस ने वहां भी विरोध तेज करने की रणनीति बना ली है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी प्रधानमंत्री के भाषण में व्यवधान डाला जाएगा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 10 जून 2004 को बीजेपी ने भी प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने से रोका था, जिसे याद दिलाना जरूरी है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने बुलाई आपात बैठक
बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें राज्यसभा में विरोध को लेकर रणनीति तय की गई।
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कांग्रेस गुरुवार सुबह 10 बजे होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक में सहयोगी दलों को अपनी मंशा से अवगत कराएगी। पार्टी बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा नेहरू और इंदिरा गांधी को लेकर दिए गए बयान से भी नाराज़ है।

राज्यसभा में हंगामे की पूरी तैयारी
इन तमाम मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने राज्यसभा में हंगामा करने की रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस के फ्लोर मैनेजर्स सहयोगी दलों से संपर्क कर चुके हैं और विपक्षी दलों ने पार्टी का साथ देने का भरोसा जताया है।
रणनीति पर जानकारी देते हुए जयराम रमेश ने कहा कि पिछले तीन दिनों से नेता विपक्ष राहुल गांधी को संसद में अपनी बात पूरी रखने से रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जानबूझकर रोके जा रहे हैं क्योंकि वह संवेदनशील और अहम मुद्दे उठा रहे हैं।
खरगे के चेंबर में विपक्षी नेताओं की बैठक
जयराम रमेश ने बताया कि इन सभी मुद्दों को लेकर कांग्रेस की बैठक हुई है और गुरुवार सुबह 10 बजे विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चेंबर में बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं द्वारा कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की जा रही अपमानजनक टिप्पणियों का पार्टी कड़ा विरोध करती है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करती है।
जयराम रमेश ने दोहराया कि परंपरा के अनुसार संसद में बहस की शुरुआत नेता विपक्ष करते हैं और प्रधानमंत्री जवाब देते हैं। ऐसे में जब तक नेता विपक्ष को बोलने नहीं दिया जाएगा, तब तक प्रधानमंत्री के भाषण का कोई औचित्य नहीं है।



