जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक शुरू होने से पहले बुधवार को भारतीय रुपया अपनी हालिया मजबूती बरकरार नहीं रख सका। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे टूटकर 90.43 के स्तर पर आ गया। एक दिन पहले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमति की खबर से रुपये में जबरदस्त उछाल देखा गया था, लेकिन यह तेजी टिकाऊ साबित नहीं हुई।

मंगलवार को ट्रेड डील की खबर के बाद शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 117 पैसे तक मजबूत हो गया था और 90.32 पर बंद हुआ था। यह एशियाई मुद्राओं में सबसे बेहतर प्रदर्शन था। हालांकि अगले ही दिन बाजार में सतर्कता हावी नजर आई।
ट्रेड डील के बावजूद रुपये पर दबाव क्यों?
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक माहौल जरूर बना है, लेकिन अभी निवेशकों में पूरी तरह भरोसा नहीं लौटा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इस डील से जुड़ा कोई हस्ताक्षरित या आधिकारिक दस्तावेज अब तक सामने नहीं आया है।
न तो समझौते का पूरा ढांचा सार्वजनिक हुआ है और न ही अंतिम शर्तों की पुष्टि की गई है। इसी अनिश्चितता के चलते रुपये पर दबाव बना रहा।
इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 90.35 पर खुला, लेकिन बाद में गिरावट के साथ 90.54 प्रति डॉलर तक फिसल गया, जो पिछले बंद स्तर से करीब 22 पैसे की कमजोरी दर्शाता है।
डॉलर कमजोर, कच्चा तेल महंगा
वैश्विक बाजार में डॉलर में खास मजबूती देखने को नहीं मिली। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.02% गिरकर 97.41 पर आ गया।
वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 0.65% चढ़कर 67.77 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो आयातक देशों के लिए चिंता का संकेत माना जा रहा है।
शेयर बाजार में बना रहा पॉजिटिव माहौल
रुपये में कमजोरी के बावजूद घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुझान बना रहा। शुरुआती कारोबार में
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सेंसेक्स 68.49 अंक की बढ़त के साथ 83,816.96 पर
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निफ्टी 51.90 अंक चढ़कर 25,779.45 के स्तर पर कारोबार करता दिखा
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भरोसा दिखा रहे हैं। मंगलवार को एफआईआई 5,236.28 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे, जिससे बाजार को मजबूती मिली।
आगे क्या देखेगा बाजार?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में
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RBI की मौद्रिक नीति के फैसले,
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील की आधिकारिक घोषणा,
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और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें
रुपये और बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
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