- प्रयागराज: माघ मेले के विवाद के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने धरना समाप्त किया
जुबिली स्पेशल डेस्क
प्रयागराज। माघ मेले के दौरान हुए स्नान विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम नगरी से वापस लौटने का फैसला लिया है। मौनी अमावस्या के पावन स्नान के दौरान मेला पुलिस ने उन्हें स्नान करने से रोक दिया था।
इस दौरान उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की भी शिकायतें सामने आई थीं। इस घटना के विरोध में शंकराचार्य बीते 10 दिनों से धरने पर बैठे थे।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “मैं अन्याय को अस्वीकार करता हूँ और न्याय का इंतजार करूँगा। आज मेरा मन भारी है और शब्द साथ नहीं दे रहे। प्रयाग में जो घटित हुआ, उसने मुझे झकझोर दिया। बिना स्नान किए मैं अत्यंत व्यथित होकर यहां से विदा ले रहा हूँ। न्याय की प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं होती, लेकिन आत्मसम्मान से समझौता स्वीकार नहीं है।”

प्रशासन का प्रस्ताव और शंकराचार्य की प्रतिक्रिया
शंकराचार्य ने बताया कि आज सुबह प्रशासन की ओर से एक प्रस्ताव भेजा गया था। इसमें कहा गया कि जब भी वे स्नान के लिए जाएँगे, उन्हें ससम्मान पालकी के साथ स्नान कराया जाएगा। साथ ही उस दिन मौजूद अधिकारी स्वयं स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे और पुष्प वर्षा भी होगी।
हालांकि, शंकराचार्य ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उनका कहना था, “प्रस्ताव में क्षमा के कोई शब्द नहीं थे। मूल मुद्दा यही है कि संतों, सन्यासियों और बटुकों के साथ जो व्यवहार हुआ, उसके लिए प्रशासन को सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए। अगर इस गलती के लिए क्षमा नहीं होगी, तो अन्य कोई प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है।”
शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने लगभग दस दिन धरने के दौरान विरोध जारी रखा। उनका यह भी कहना था कि उन्होंने वापस लौटने का निर्णय लिया, उसके बाद ही प्रशासन की ओर से प्रस्ताव आया। अब वे भारी मन लेकर प्रयाग से जा रहे हैं।
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