जुबिली न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून के विरोध में देशभर के राज्यों में प्रदर्शन जारी हैं। वहीं, अब विरोध केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रहा—बीजेपी के कई पदाधिकारी और नेता भी इस कानून को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।

सोमवार (26 जनवरी) को श्रावस्ती में पूर्व जिला अध्यक्ष उदय प्रकाश तिवारी और कई अन्य नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस मौके पर उन्होंने UGC कानून के खिलाफ नारेबाजी की और इसे बच्चों के लिए हानिकारक करार दिया।
नेताओं का बयान
उदय प्रकाश तिवारी ने मीडिया से कहा, “UGC कानून हमारे बच्चों के हित में नहीं है। इसके कुछ नियम सीधे तौर पर छात्रों के नुकसान का कारण बन सकते हैं। हम इसका विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ सुनना कोई जरूरी नहीं है।”
बीजेपी शिक्षा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष राज किशोर पांडेय ने भी UGC कानून को “ब्राह्मण और सवर्ण विरोधी” बताते हुए कहा कि यह कानून उच्च जातियों के लिए खतरा बन सकता है।
लखनऊ में भी इस्तीफों का दौर
लखनऊ में बीजेपी को और झटका लगा है। जिला पार्टी के कुम्हरावां मंडल के मंडल महामंत्री अंकित तिवारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ 10 अन्य पदाधिकारी ने भी सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है।
भविष्य में चुनावों पर असर
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि UGC कानून के विरोध में पार्टी के अपने ही नेताओं के इस्तीफे और ब्राह्मण तबके का असंतोष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है।
देशभर में इस कानून को लेकर लगातार बढ़ रहे विरोध ने बीजेपी की स्थिति को जटिल कर दिया है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने यह चुनौती है कि वह इस असंतोष को कैसे नियंत्रित करेगा।
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