जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बैठने की व्यवस्था को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार पर परंपराओं की अनदेखी का आरोप लगाया है।

तारिक अनवर ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का एक तय प्रोटोकॉल होता है, लेकिन राहुल गांधी को आगे की पंक्ति में जगह नहीं दी गई, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा, “नेता प्रतिपक्ष को लोकतंत्र में ‘शैडो प्रधानमंत्री’ माना जाता है, लेकिन इस सरकार में उनकी भूमिका को लगातार कमतर किया जा रहा है।”
‘मोदी सरकार में खत्म की जा रही परंपराएं’
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में संवैधानिक और लोकतांत्रिक परंपराओं को धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि मुख्य विपक्षी दल के नेता को सरकारी समारोह में दूसरी या तीसरी पंक्ति में बैठाया जाए। ब्रिटिश संसदीय परंपरा में नेता प्रतिपक्ष को विशेष सम्मान दिया जाता है, लेकिन भारत में इसके उलट हो रहा है।”
‘लोकतंत्र के लिए ठीक संकेत नहीं’
तारिक अनवर ने कहा कि संसद के भीतर भी विपक्ष के नेता को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता और अब सरकारी कार्यक्रमों में भी उचित स्थान नहीं दिया जा रहा, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सामने आए वीडियो में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को राहुल गांधी से आगे की पंक्ति में बैठे देखा गया, जिसे लेकर कांग्रेस और ज्यादा नाराज़ दिखी।
राहुल गांधी ने संविधान को बताया सुरक्षा कवच
इस विवाद के बीच राहुल गांधी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “हमारा संविधान हर भारतीय की आवाज़ है और हमारे अधिकारों का सुरक्षा-कवच। इसी मजबूत नींव पर हमारा गणतंत्र खड़ा है, जो समानता और सौहार्द से ही सशक्त होगा।”
तीसरी पंक्ति में बैठे दिखे राहुल गांधी
गणतंत्र दिवस परेड में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आगे की पंक्ति में बैठे नजर आए। वहीं राहुल गांधी और खरगे को कुछ समय के लिए तीसरी पंक्ति में बैठा देखा गया, जिससे यह विवाद और गहरा गया। कार्यक्रम में भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन भी मौजूद थे।
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