जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के हालिया भारत दौरे के बाद भारत-यूएई संबंधों में नई मजबूती देखने को मिल रही है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ऐतिहासिक रक्षा समझौता और व्यापार एवं निवेश सहयोग पर सहमति जताई, जिसे क्षेत्रीय राजनीति में बड़ा कदम माना जा रहा है।

पाकिस्तान को यूएई का बड़ा झटका:
हालांकि, भारत के साथ संबंध मजबूत होने के उलट, यूएई ने इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, यूएई ने न तो कोई स्थानीय साझेदार चुना और न ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाई। इस कदम को यूएई-पाकिस्तान संबंधों में दूरी का संकेत माना जा रहा है, खासकर तब, जब पाकिस्तान सऊदी अरब के करीब जा रहा है और यूएई-सऊदी रिश्तों में खटास बढ़ रही है।
पाकिस्तान से दूरी के कारण:
यूएई पहले पाकिस्तान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। लाखों पाकिस्तानी नागरिकों की रेमिटेंस और रक्षा, ऊर्जा व निवेश क्षेत्र में सहयोग इसकी मिसाल रहे हैं। लेकिन सुरक्षा चिंताएं, प्रशासनिक समस्याएं, सरकारी उपक्रमों के नुकसान और राजनीतिक दखल ने यूएई का भरोसा कमजोर किया। इस बीच पाकिस्तान को कई सरकारी संस्थानों का निजीकरण करना पड़ा, जिसमें PIA का निजीकरण भी शामिल है।
भारत-यूएई सहयोग की नई दिशा:
भारत दौरे के दौरान 900 भारतीय कैदियों की रिहाई यूएई द्वारा भारत के प्रति एक बड़ा सद्भावना कदम माना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई।
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दोनों देशों ने वर्ष 2032 तक वार्षिक व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। इसके अलावा, एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की रूपरेखा तैयार की गई, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक संतुलन के लिए अहम मानी जा रही है।
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