Friday - 23 January 2026 - 11:13 PM

कश्मीर से मसूरी तक बरसी ‘सफेद आफत’, जानिए इस बर्फबारी के पीछे क्या है PAK कनेक्शन

जुबिली स्पेशल डेस्क 

दिल्ली में बारिश और पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी से शुक्रवार को मौसम ने अचानक करवट ले ली। लंबे समय से शुष्क मौसम झेल रहे उत्तर भारत में एक साथ हुई इस बारिश और बर्फबारी ने आम लोगों के साथ-साथ मौसम विशेषज्ञों को भी चौंका दिया। सवाल यही है कि 107 दिनों तक सूखे हालात रहने के बाद अचानक ऐसा बदलाव क्यों आया और क्या सर्दियों में इतनी बर्फबारी सामान्य मानी जाती है?

एनडीटीवी इंडिया ने मौसम के इस बदलाव को लेकर विशेषज्ञों से बातचीत की। जानकारों के मुताबिक, शुक्रवार को हुई बारिश और बर्फबारी किसी एक सिस्टम की वजह से नहीं, बल्कि दो मौसमीय प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने का नतीजा थी।

दरअसल, पाकिस्तान के ऊपर एक कम दबाव (लो प्रेशर) का क्षेत्र बना, जिससे सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस को अतिरिक्त नमी मिली। भूमध्य सागर से आने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस को जहां अरब सागर से नमी मिली, वहीं इस लो प्रेशर सिस्टम के कारण बंगाल की खाड़ी से भी नमी की सप्लाई हुई। नतीजा यह रहा कि पूरा हिमालय क्षेत्र बर्फ की चादर से ढक गया।

स्काईमेट वेदर के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट महेश पलावत बताते हैं,“सर्दियों में बर्फबारी कोई असामान्य घटना नहीं है, लेकिन जब एक सिस्टम को दो दिशाओं से नमी मिलती है, तो इतनी व्यापक और अचानक बर्फबारी देखने को मिलती है। यही वजह रही कि ऊपरी से लेकर निचले हिमालय तक भारी बर्फ गिरी।”

विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल मौसम का मिजाज कुछ उल्टा जरूर रहा है। आमतौर पर हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी की शुरुआत दिसंबर में हो जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के सीनियर वैज्ञानिक आर.के. जेनामणि के अनुसार,“सर्दियों में बर्फबारी न होना असामान्य माना जाता है। इस बार क्लाइमेट चेंज की वजह से हिमालय के दक्षिणी हिस्सों में लंबे समय तक शुष्क मौसम बना रहा। अक्टूबर के बाद बारिश न होना, बर्फबारी से ज्यादा असामान्य स्थिति थी।”

अब देर से ही सही, लेकिन सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर हिमालय के दक्षिणी इलाकों में साफ दिख रहा है। इसका असर मैदानी इलाकों में भी पड़ेगा। हाल के दिनों में दिल्ली का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जो सामान्य से 6–7 डिग्री ज्यादा था। लेकिन इस बारिश और बर्फबारी के बाद अगले कुछ दिनों में रात और सुबह के तापमान में गिरावट आने की संभावना है—यानी ठंड की विदाई अब थोड़ी देर से होगी।

Radio_Prabhat
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