Friday - 23 January 2026 - 4:26 PM

तुर्कमान गेट हिंसा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी की जमानत रद्द

जुबिली न्यूज डेस्क

तुर्कमान गेट हिंसा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उस आरोपी को दी गई जमानत रद्द कर दी, जो इस महीने की शुरुआत में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान हुई पथराव की घटना में कथित तौर पर शामिल था।

जस्टिस प्रतीक जालान की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए अधीनस्थ अदालत को वापस भेज दिया है

“यह असाधारण मामला है” — हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा,“अदालत आमतौर पर किसी व्यक्ति को दी गई राहत में हस्तक्षेप करने से परहेज करती है, लेकिन यह एक असाधारण मामला है।”

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेहड़ी-पटरी लगाने वाले उबैदुल्ला को दिया गया जमानत आदेश अस्पष्ट और तर्कहीन था, जिसे कायम नहीं रखा जा सकता।बता दें कि अधीनस्थ अदालत ने 20 जनवरी को उबैदुल्ला को जमानत दी थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है।

अभियोजन पक्ष के तर्कों पर नहीं हुआ समुचित विचार

जस्टिस प्रतीक जालान ने अपने आदेश में कहा कि—

  • जमानत देते समय अभियोजन पक्ष के तर्कों पर सही ढंग से विचार नहीं किया गया

  • जमानत से जुड़े कानूनी मानकों और कारकों का समुचित विश्लेषण नहीं हुआ

  • आदेश में पर्याप्त कारणों का अभाव था

कोर्ट ने कहा कि इसी वजह से अधीनस्थ अदालत का आदेश रद्द किया जाता है और मामले को दोबारा विचार के लिए सत्र न्यायालय को सौंपा जाता है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 6 और 7 जनवरी की दरम्यानी रात का है, जब रामलीला मैदान क्षेत्र में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण-रोधी अभियान चलाया जा रहा था।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, उसी दौरान—

  • सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई कि
    तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को गिराया जा रहा है

  • इस अफवाह के बाद 150 से 200 लोग मौके पर इकट्ठा हो गए

  • भीड़ ने पुलिस और दिल्ली नगर निगम (MCD) कर्मियों पर पथराव और कांच की बोतलें फेंकी

इस हिंसा में थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

पुलिस का दावा— पहले ही दी गई थी पूरी जानकारी

दिल्ली पुलिस ने बताया कि अतिक्रमण हटाने से पहले—

  • इलाके में अमन कमेटी के साथ बैठक की गई थी

  • 120 से 130 मौलवियों के साथ चर्चा हुई थी

  • साफ किया गया था कि मस्जिद को नहीं, बल्कि उसके आसपास के अतिक्रमण को हटाया जाएगा

पुलिस के मुताबिक, यह भी कहा गया था कि यदि किसी को आदेश पर आपत्ति है, तो कानूनी रूप से अपील का रास्ता खुला है, लेकिन हिंसा का कोई औचित्य नहीं था।

अब क्या होगा?

अब इस मामले में—

  • जमानत आदेश पर दोबारा सुनवाई होगी

  • सत्र न्यायालय सभी तथ्यों और तर्कों की नए सिरे से समीक्षा करेगा

  • तब तय होगा कि आरोपी को जमानत मिलनी चाहिए या नहीं

हाई कोर्ट के इस फैसले को तुर्कमान गेट हिंसा मामले में सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

Radio_Prabhat
English

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com