जुबिली न्यूज डेस्क
बेंगलुरु: केंद्र सरकार की मनरेगा योजना के नाम परिवर्तन के विरोध में कर्नाटक सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल थावर चंद गहलोत और सरकार के बीच गंभीर विवाद खड़ा हो गया। राज्यपाल का भाषण केवल पहले और आखिरी पैराग्राफ तक ही सीमित रहा, जिससे सत्ताधारी कांग्रेस विधायकों में गहरा रोष फैल गया और सदन में हंगामा मच गया।

राज्यपाल ने भाषण क्यों अधूरा पढ़ा?
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैयासरकार द्वारा तैयार भाषण से 11 बिंदुओं को हटाने का सुझाव राज्यपाल ने दिया था, जिसे सरकार ने अस्वीकार कर दिया। इसी कारण यह अनुमान लगाया जा रहा था कि राज्यपाल भाषण देने के लिए नहीं आएंगे, और सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
विधानसभा में हंगामा
राज्यपाल जब विधानसभा में पहुंचे, उन्होंने केवल भाषण के पहले और आखिरी पैराग्राफ पढ़े और प्रस्थान कर गए। उनके जाने के समय, एमएलसी बीके हरिप्रसाद ने रोकने का प्रयास किया, जबकि कांग्रेस विधायकों ने राज्यपाल के खिलाफ नारे लगाए। सदन में अफरा-तफरी मच गई। अंत में अध्यक्ष यूटी खादर, होरट्टी और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल को विदाई दी।
सिद्धारमैयासरकार का बयान
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल के इस कदम को असंवैधानिक और केंद्र सरकार की कठपुतली जैसा बताया। उन्होंने कहा:
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राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार भाषण नहीं पढ़ा, जो संविधान के अनुसार उनका कर्तव्य है।
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यह कदम लोकतंत्र के इतिहास में काला दिन है।
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सरकार सर्वोच्च न्यायालय जाने पर विचार करेगी और आगे का निर्णय लिया जाएगा।
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विधायक राज्यपाल के इस कदम का विरोध और निंदा करेंगे।
सिद्धारमैयासकार ने यह भी कहा कि राज्यपाल को साल के पहले सत्र में भाषण देना चाहिए। उन्होंने एमएनआरईजीए को बहाल करने और वीबी जी रामजी सरकार को समाप्त करने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही।
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आगे क्या होगा?
राज्यपाल ने केवल पहले और आखिरी पैराग्राफ पढ़े हैं, इसलिए सूत्रों के अनुसार सत्र आयोजित करने में कोई समस्या नहीं होगी। हालांकि, राजनीतिक तनाव और कानूनी लड़ाई जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
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