जुबिली स्पेशल डेस्क
महाराष्ट्र निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब मुंबई के मेयर पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है।
बीएमसी में महायुति को बहुमत मिलने के बावजूद सहयोगी दलों के बीच मेयर पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। इसी बीच शिवसेना (शिंदे गुट) द्वारा अपने सभी पार्षदों को होटल में ठहराए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
इस मुद्दे पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने शिंदे गुट और बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। राउत ने दावा किया कि उनके संपर्क में कई पार्षद हैं और कोई भी बीजेपी का मेयर नहीं चाहता। उन्होंने यहां तक कहा कि खुद एकनाथ शिंदे भी नहीं चाहते कि बीजेपी का मेयर बने।
‘ताज होटल को जेल बना दिया गया’ संजय राउत
संजय राउत ने आरोप लगाया कि जीतकर आए पार्षदों को ताज होटल में “कैद” करके रखा गया है। उनका कहना है कि शिंदे गुट को डर है कि उनके पार्षद टूट सकते हैं, इसलिए उन्हें बाहर जाने की आज़ादी नहीं दी जा रही। राउत ने इसे नाइंसाफी करार देते हुए कहा कि यह पार्षदों का अधिकार है और मुख्यमंत्री को उनकी तत्काल रिहाई का आदेश देना चाहिए।
‘उपमुख्यमंत्री होकर भी डर’
राउत ने आगे कहा कि एकनाथ शिंदे खुद उपमुख्यमंत्री हैं, फिर भी उन्हें डर सता रहा है कि उनके नगरसेवक भगा लिए जाएंगे। उन्होंने शिंदे गुट को बीजेपी का “अंगवस्त्र” बताते हुए कहा कि अंतिम फैसला बीजेपी ही करेगी और देवेंद्र फडणवीस उनकी बात नहीं सुनेंगे। राउत ने 2022 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पहले विधायकों को सूरत ले जाया गया था, अब नगरसेवकों को होटल में रखा जा रहा है।
‘पर्दे के पीछे बहुत कुछ चल रहा है’
संजय राउत ने दावा किया कि कई नगरसेवक नए चेहरे हैं और वे शिवसैनिक विचारधारा से जुड़े हैं, जो बीजेपी का मेयर नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि आज के दौर में संचार के कई साधन हैं और संपर्क बनाए रखना मुश्किल नहीं है। राउत ने संकेत दिए कि पर्दे के पीछे कई तरह की राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं और उनकी पार्टी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
मेयर चुनाव को लेकर गणित और बढ़ी सरगर्मी
मुंबई के 227 वार्डों में बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं, जबकि शिंदे गुट को 29 वार्ड मिले हैं। बहुमत के आंकड़े 114 तक पहुंचने के लिए बीजेपी को शिंदे गुट के कम से कम 25 पार्षदों का समर्थन चाहिए। यही वजह है कि मेयर पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और बातचीत के जरिए मेयर का चुनाव किया जाएगा। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर सब कुछ सामान्य होता, तो पार्षदों को होटल में रखने की जरूरत नहीं पड़ती। कई विश्लेषकों के मुताबिक, यह घटनाक्रम 2022 में शिवसेना टूट के समय की याद दिलाता है।
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