जुबिली न्यूज डेस्क
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बीते कुछ दिनों से तनाव अपने चरम पर है। हालात ऐसे बन गए हैं कि दुनिया भर में यह आशंका जताई जा रही है कि दोनों देश कभी भी एक-दूसरे पर हमला कर सकते हैं। हालांकि, ज़मीनी हालात और हालिया घटनाक्रम कुछ ऐसे संकेत दे रहे हैं, जो बताते हैं कि फिलहाल युद्ध टल सकता है।

फैक्ट नंबर 1: इरफान सुल्तानी की फांसी टली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को तब खुली चेतावनी दी थी, जब ईरानी प्रशासन ने प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी को सरेआम फांसी देने का ऐलान किया था। ट्रंप ने कहा था कि अगर फांसी दी गई तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
फांसी की तारीख 14 जनवरी तय थी, लेकिन ऐन वक्त पर इसे टाल दिया गया। इसके बाद ट्रंप ने खुद कहा कि ईरान में “फांसी और हत्याएं रुक रही हैं।” इसे ट्रंप के रुख में नरमी और तनाव घटने का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
फैक्ट नंबर 2: ईरान ने फिर खोला अपना एयरस्पेस
अमेरिकी धमकियों के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र पूरी तरह बंद कर दिया था, जो युद्ध जैसी स्थिति का स्पष्ट संकेत माना जाता है। एयरस्पेस बंद होने का मतलब था कि किसी भी विमान की एंट्री को दुश्मनाना कार्रवाई समझा जा सकता था।
अब ईरान ने फिर से अपना एयरस्पेस खोल दिया है और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं, जो तनाव में कमी की ओर इशारा करता है।
फैक्ट नंबर 3: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
अगर युद्ध की आशंका वास्तविक होती, तो उसका सबसे पहला असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखता। लेकिन इसके उलट 15 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें करीब 2 डॉलर प्रति बैरल गिर गईं।
बाजार की यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत मानी जा रही है कि निवेशकों को फिलहाल युद्ध की आशंका कम लग रही है।
फैक्ट नंबर 4: अमेरिकी ‘मदद’ जमीन पर नहीं दिखी
हाल के दिनों में ट्रंप ने ईरान के प्रदर्शनकारियों को खुलकर समर्थन दिया था और यहां तक कहा था कि वे सरकारी इमारतों पर कब्जा करते रहें, जल्द ही उन्हें मदद मिलेगी।
हालांकि, इस बयान को तीन-चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन कोई ठोस सैन्य या लॉजिस्टिक मदद प्रदर्शनकारियों तक नहीं पहुंची।
ओवल ऑफिस में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या सैन्य कार्रवाई रोक दी गई है, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि “अभी देखा जा रहा है।”
हालांकि खतरा पूरी तरह टला नहीं
इन संकेतों के बावजूद कुछ घटनाएं ऐसी भी हैं, जो चिंता बढ़ाती हैं।
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अमेरिकी नौसेना का एक जंगी बेड़ा दक्षिण चीन सागर से ईरान की दिशा में बढ़ रहा है
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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का सख्त रुख हालात को किसी भी समय बदल सकता है
फिलहाल जो संकेत सामने आ रहे हैं, वे यह बताते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल युद्ध की संभावना कम होती दिख रही है। हालांकि हालात बेहद नाज़ुक हैं और किसी एक चूक से स्थिति फिर विस्फोटक हो सकती है। दुनिया की निगाहें अब दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।
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