खामेनेई नहीं झुके, बातचीत बंद, क्या USA करेगा हमला?

जुबिली स्पेशल डेस्क
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच सीधा संवाद पूरी तरह टूट गया है।
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकोफ के बीच चल रही बातचीत फिलहाल निलंबित कर दी गई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई को लेकर हस्तक्षेप की धमकियां दे रहे हैं। तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला किया गया तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा।
परमाणु डील की उम्मीदों पर पानी
अमेरिका, यूरोपीय देशों और इजरायल के साथ मिलकर बीते करीब एक साल से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की कोशिश कर रहा था। हालांकि, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा तनाव ने किसी भी तरह की प्रगति की संभावना को खत्म कर दिया है।
उनका आरोप है कि अमेरिकी धमकियों ने कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर कर दिया है, जिसके चलते दशकों पुराने परमाणु विवाद के समाधान को लेकर प्रस्तावित बैठकें भी रद्द कर दी गई हैं।
पड़ोसी देशों को भी चेतावनी
ईरानी अधिकारी ने बुधवार (14 जनवरी 2026) को बताया कि तेहरान ने उन पड़ोसी देशों को आगाह कर दिया है, जो अमेरिकी सेना को किसी भी तरह की मदद दे सकते हैं।

चेतावनी में कहा गया है कि यदि वॉशिंगटन ने हमला किया, तो ईरान सीधे अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व में स्थित एक प्रमुख अमेरिकी हवाई अड्डे से कुछ कर्मचारियों को हटने की सलाह भी दी गई है।
भारतीय नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह
बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एडवाइजरी जारी कर ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से जल्द से जल्द देश छोड़ने को कहा है। मंत्रालय ने लोगों को विरोध प्रदर्शनों और रैलियों से दूर रहने, भारतीय दूतावास के संपर्क में बने रहने और जरूरी दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी है।
ट्रंप का प्रदर्शनकारियों को खुला समर्थन
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में सोशल मीडिया पर बयान जारी किया था। उन्होंने लिखा था, “अपना विरोध जारी रखो, आपकी मदद रास्ते में है।”
ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों से संस्थाओं पर कब्जा करने और कथित अत्याचारियों का हिसाब रखने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि जब तक प्रदर्शनकारियों की “बेवजह हत्याएं” नहीं रुकतीं, तब तक ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकों को रद्द रखा जाएगा।



