धार्मिक स्थलों पर हमले और घरों में आग…बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति गंभीर

जुबिली स्पेशल डेस्क
ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। देश में रह रहे करीब 1 करोड़ 31 लाख हिंदू लगातार दहशत के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
हालात ऐसे बन गए हैं कि हर वक्त जान का खतरा बना हुआ है। इन घटनाओं को लेकर अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
बीते कुछ दिनों में सामने आई घटनाओं के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कट्टरपंथी तत्व चुन-चुनकर हिंदू परिवारों, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक केंद्रों को निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में हिंदुओं को धमकाने, पूजा स्थलों पर हमले, घरों में आगजनी और जबरन पलायन के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
‘हिंदू भगाओ’ की सुनियोजित रणनीति के आरोप
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि हिंसा एक सुनियोजित पैटर्न के तहत हो रही है। पहले धमकियां दी जाती हैं, फिर मंदिरों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जाता है। इसके बाद हिंदू परिवारों के घर जलाए जाते हैं और व्यापारियों व कलाकारों को प्रताड़ित किया जाता है। कई मामलों में हिंसा चरम पर पहुंचकर हत्या तक पहुंच जाती है।

हाल ही में दीपू चंद्र दास की हत्या का मामला भी इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
चटगांव में घर जलाने का मामला, तस्लीमा नसरीन ने उठाए सवाल
बांग्लादेश के चटगांव में हिंदू परिवारों के घर जलाए जाने की घटना ने स्थिति की गंभीरता को और उजागर कर दिया है। आरोप है कि हमलावरों ने पहले घर को बाहर से बंद किया और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। सौभाग्य से परिवार के सदस्य किसी तरह जान बचाने में सफल रहे।
इस घटना को लेकर बांग्लादेश की मशहूर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए यूनुस सरकार से चार अहम सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा—
- क्या हिंदू-विरोधी कट्टरपंथियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होगी?
- क्या पीड़ित हिंदू परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा?
- क्या ऐसी गंभीर घटनाओं को नजरअंदाज किया जाएगा?
- क्या हिंदुओं को इसी तरह जलकर मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा?
हिंसा के पीछे क्या कारण?
बांग्लादेश में हालिया हिंसा को लेकर कई तरह की थ्योरी सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि हिंसा की शुरुआत उस्मान हादी की हत्या के बाद हुई।
कुछ दावों के मुताबिक, कट्टरपंथी तत्वों का सरकार पर प्रभाव बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि अगले आम चुनाव को टालने के लिए हिंसा को हवा दी जा रही है। हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर अब तक स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं दिया गया है।
फिलहाल बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है और यूनुस सरकार पर कट्टरपंथी हिंसा पर नियंत्रण न कर पाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।



