यूपी विधानसभा: आरोप लगाने से पहले शपथ पत्र देने का निर्देश, अध्यक्ष सतीश महाना का सख्त रुख

जुबिली न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन मंगलवार को सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के सदस्यों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि किसी पर भी आरोप लगाने से पहले उनके समक्ष शपथ पत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत करना होगा।

दरअसल, समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सदस्य ने चीनी मांझे से होने वाले हादसों से जुड़े प्रश्न के लिखित उत्तर पर असंतोष जताते हुए सरकार पर गलत सूचना देने का आरोप लगाया। प्रश्नकाल समाप्त हो जाने के कारण पूरक प्रश्न न पूछ पाने पर सपा के वरिष्ठ विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि सरकार ने उनके सवाल का सही जवाब नहीं दिया।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विरोध करते हुए कहा कि सरकार की ओर से दिया गया जवाब पूरी तरह सही है। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह परंपरा बनती जा रही है कि मंत्री सीधे सवाल का जवाब देने के बजाय पिछली सरकारों पर आरोप लगाते हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार किसी पर आरोप लगाने से पहले सबूत होने चाहिए और यदि यह परिपाटी बंद नहीं हुई तो विपक्ष तत्काल विरोध करेगा।
माता प्रसाद पांडेय ने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के एक उत्तर पर भी आपत्ति जताई। इस पर सुरेश कुमार खन्ना ने सफाई देते हुए कहा कि मंत्री ने किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, बल्कि सामान्य रूप से पिछली सरकारों की बात की है।
सदन में बढ़ते विवाद के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने व्यवस्था देते हुए कहा, “मैं सभी सदस्यों से कहूंगा कि आरोप लगाने से पहले शपथ पत्र मेरे टेबल पर भेजें। यह नियम सदन के सभी 403 सदस्यों पर लागू होगा, चाहे प्रश्न पूछने वाला हो या सरकार की ओर से जवाब देने वाला।”
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महाना ने आगे कहा कि कोई भी सदस्य यदि प्रश्न पूछता है तो उसे प्रमाणित करना होगा। इस पर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आपत्ति जताई, जिस पर अध्यक्ष ने टिप्पणी करते हुए कहा, “अब आप पलट गए।”अध्यक्ष के इस निर्देश के बाद सदन में राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।


