ईरान पर फिर मंडरा रहा अमेरिकी-इजराइली हमले का खतरा, 5 बड़े संकेत

जुबिली स्पेशल डेस्क

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर गहराने लगा है। संकेत मिल रहे हैं कि अगले चार महीनों के भीतर अमेरिका और इजराइल ईरान पर बड़ा हमला कर सकते हैं।

जून 2025 में अमेरिका ने ईरान के तीन ठिकानों पर बी-2 बॉम्बर से हमला किया था, जो पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था। अब हालात फिर से उसी दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं।

असल विवाद ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान इस प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म कर दे, क्योंकि संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।

हमले की तैयारी के 5 संकेत

1. कूटनीतिक वार्ता नाकाम

ईरान के विदेश मंत्री अराघाची यूरोपीय मंत्रियों के साथ अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ से मिलने की कोशिश कर रहे थे। उनका मकसद यूरेनियम वार्ता को फिर से पटरी पर लाना था। लेकिन विटकॉफ ने मिलने से इनकार कर दिया और साफ कर दिया कि जब तक ईरान यूरेनियम संवर्धन रोकने और मिसाइल निर्माण सीमित करने का वादा नहीं करता, कोई बातचीत संभव नहीं।

2. अमेरिकी सैन्य तैनाती

अमेरिका ने अपने दर्जनभर KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमानों को मध्य पूर्व के बेस की ओर भेजा है। ठीक यही तैयारी पिछले हमले से पहले भी देखी गई थी, जिसके बाद बी-2 बॉम्बर से अटैक किया गया था।

3. इजराइल की चेतावनी

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया है कि उन्हें पुख्ता जानकारी है कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम कहां छिपा रखा है। माना जा रहा है कि ईरान के पास 400 किलो से ज्यादा संवर्धित यूरेनियम है, जिससे करीब 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं।

4. राजधानी बदलने की तैयारी

खबर है कि ईरान के राष्ट्रपति ने सुप्रीम लीडर खामेनेई को प्रस्ताव भेजा है कि राजधानी को तेहरान से हटाया जाए। आधिकारिक कारण पानी की समस्या बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे संभावित हमले से बचाव की रणनीति मान रहे हैं।

5. आंतरिक सियासी साज़िशें

पूर्व शासक मोहम्मद रेजा शाह पहलवी फिर से सक्रिय हो गए हैं। बताया जा रहा है कि वे पश्चिमी देशों और इजराइल के समर्थन से खामेनेई की सत्ता पलटने की कोशिश कर रहे हैं। इजराइल भी पहलवी को ईरान की सत्ता में वापसी दिलाने की कवायद में शामिल है।

इन पाँच संकेतों से साफ है कि ईरान पर अमेरिकी-इजराइली हमले की आशंका तेज हो गई है। अगर ऐसा हुआ तो यह न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया के लिए भू-राजनीतिक संकट खड़ा कर सकता है।

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