यूपीएस और एनपीएस के खिलाफ देशभर में विरोध, 1 मई को जंतर मंतर पर महाधरना

जुबिली न्यूज डेस्क

लखनऊ, केंद्र सरकार द्वारा यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू करने के फैसले के खिलाफ देशभर में शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों ने काले दिवस के रूप में विरोध प्रदर्शन किया। एनएमओपीएस और अटेवा पेंशन बचाओ मंच, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर सभी सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारी काली पट्टी बांधकर अपने-अपने कार्यस्थलों पर विरोध दर्ज कराते नजर आए।

ग्लोब पार्क में जोरदार प्रदर्शन, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन

लखनऊ के ग्लोब पार्क में शिक्षकों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान “एनपीएस-यूपीएस गो बैक” के नारे लगाए गए और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की गई।

यूपीएस को बताया एनपीएस से भी घातक

अटेवा के अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने कहा, “यूपीएस कर्मचारियों के हित में नहीं है, बल्कि यह एनपीएस से भी अधिक घातक साबित होगी। केंद्र सरकार को इसे तत्काल वापस लेना चाहिए और पुरानी पेंशन बहाल करनी चाहिए।”

प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरज पति त्रिपाठी ने कहा, “एनपीएस और यूपीएस के तहत कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई डूब रही है। स्टॉक मार्केट में गिरावट से पेंशन फंड को बड़ा नुकसान हो रहा है। इसलिए इस योजना को जल्द से जल्द बंद किया जाना चाहिए।”

1 मई को जंतर मंतर पर होगा बड़ा प्रदर्शन

लखनऊ में हुए इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारी शामिल हुए। लुआक्टा अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे ने कहा, “अटेवा की यह लड़ाई सही दिशा में जा रही है। हमें इसे और मजबूत करना होगा। सभी संगठनों को एकजुट होकर 1 मई को दिल्ली के जंतर मंतर पर होने वाले विशाल प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए।”

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प्रदर्शन में हजारों कर्मचारी शामिल

इस विरोध प्रदर्शन में अशोक कुमार (स्वास्थ्य महासंघ), सुनील कुमार वर्मा (जिला संयोजक, लखनऊ), विजय यादव (महामंत्री, अटेवा सिंचाई विभाग), अमित यादव (कृषि विभाग), नरेंद्र प्रताप सिंह (कलेक्ट्रेट), यदुनंदिनी सिंह (नर्सिंग अध्यक्ष, KGMC), विक्रमादित्य मौर्य (प्रदेश कोषाध्यक्ष), बलरामपुर हॉस्पिटल के सुनील यादव सहित कई प्रमुख नेता व कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

इस मौके पर हजारों शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर एकजुटता दिखाई और सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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