कंप्यूटर बाबा के आश्रम पर चला बुलडोजर

जुबिली न्यूज़ डेस्क

मध्य प्रदेश में कभी कैबिनेट मंत्री रहे और कांग्रेस पार्टी के करीबी माने जाने वाले कंप्यूटर बाबा की परेशानी बढ़ गई है। दरअसल कंप्यूटर बाबा (रामदेव दास त्यागी) का जम्बूड़ी हप्सी गांव में सरकारी जमीन पर बने आश्रम को रविवार सुबह ढहा दिया गया। इस दौरान प्रशासन की कार्रवाई के तहत विरोध करने वालों की कंप्यूटर बाबा सहित 7 लोगों को जेल भेजा गया है।

इस मामले में अधिकारियों ने बताया कि बाबा को सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के लिए कई बार नोटिस दिए गये। अर्थदंड के अलावा शासकीय भूमि से बेदखल करने का आदेश भी पारित किया गया था। लेकिन बाबा ने 46 एकड़ जमीन में से तीन एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर घर बना लिया था। इसके बाद ये कार्रवाई की गई।

वहीं, प्रशासन की तरफ से की गई कार्रवाई को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने निंदा की। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि इंदौर में बदले की भावना से कंप्यूटर बाबा का आश्रम व मंदिर बिना किसी नोटिस दिए तोड़ा जा रहा है। यह राजनैतिक प्रतिशोध की चरम सीमा है। मैं इसकी निंदा करता हूं।

क्या है मामला

बताया जा रहा है कि इंदौर के जम्बूड़ी हप्सी गांव में रामदेव दास त्यागी उर्फ़ कंप्यूटर बाबा ने 46 एकड़ जमीन में से तीन एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके घर बना लिया था। जब मामला गरमाया तो पिछले दिनों राजस्व विभाग ने इसकी जांच की। इसमें खुलासा होने के बाद सुबह-सुबह कलेक्टर मनीष सिंह के आदेश पर प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कब्जा हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

एसडीएम राजेश राठौर और शाश्वत शर्मा ने बताया कि बाबा ने तीन एकड़ जमीन पर कब्जा करके घर बना लिया गया था। किसी तरह का विरोध न हो इसके लिए प्रशासन ने पहले ही पुख्ता इंतजाम कर लिए थे और राजस्व अमले के साथ गांधी नगर थाने की पुलिस बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद थी। इसके बाद कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

बाबा को बनाया था स्टार प्रचारक

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में विधानसभा की 28 सीटों के लिए हुए उपचुनाव में कंप्यूटर बाबा को कांग्रेस पार्टी ने स्टार प्रचारक का दर्जा दिया था। इसके तहत नामदेव दास त्यागी ने विभिन्न विधानसभा सीटों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में वोट मांगे थे।

कांग्रेस पार्टी के करीबी रहे कंप्यूटर बाबा अक्सर बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। फ़िलहाल अब देखना ये है कि जब बाबा आश्रम पर सरकार ने हथौड़ा चलाया है, तो इस हालात से वे कैसे निपटते हैं।

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