रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक से क्या फायदा होगा

जुबिली न्यूज़ डेस्क 

चीन के साथ सीमा पर तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ा एलान किया है। रक्षा मंत्री ने कहा है कि रक्षा मंत्रालय अब आत्मनिर्भर की पहल को आगे बढ़ान के लिए तैयार है। रक्षा उत्पादन के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए एमओडी 101 से अधिक वस्तुओं पर आयात एम्बार्गो पेश करेगा। लद्दाख में एक्चुअल लाइन ऑफ कंट्रोल पर चीन के साथ तनाव के बीच रक्षा मंत्री के इस ऐलान को काफी अहम माना जा रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि इस लिस्ट में न केवल कुछ पार्ट्स शामिल हैं बल्कि उच्च प्रौद्योगिकी वाले हथियार मसलन असॉल्ट राइफलें, सोनार सिस्टम, ट्रांसपोर्ट एयरक्रॉफ्ट, LCH, रडार और कई अन्य चीजें शामिल हैं।

 राजनाथ सिंह ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 स्तंभों अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रचर, प्रणाली, जनसांख्यिकी और मांग के आधार पर एक ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए एक स्पष्ट आह्वान किया है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नाम से एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।

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केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा, ‘आयात पर बैन को 2020 से लेकर 2024 के बीच लागू करने की योजना है। हमारा उद्देश्य सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं के मामले में रक्षा उद्योग को आगे बढ़ाना है ताकि स्वदेशीकरण के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।’

राजनाथ सिंह ने कहा कि जिन 101 उपकरणों पर बैन लगाया गया है, उनमें सिर्फ छोटे पार्ट्स शामिल नहीं हैं, बल्कि उसमें कुछ उच्च तकनीक वाले हथियार सिस्टम भी हैं जैसे- आर्टिलरी गन, असॉल्ट राइफलें, कोरवेट, सोनार सिस्टम, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, एलसीएच, रडार आदि।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ की बात कर चुके हैं, यह उस दिशा में एक बड़ा कदम है। भारत उन देशों में शामिल हैं जो दुनिया में सबसे ज्‍यादा हथियारों का आयात करते हैं। 2015-2019 के बीच विदेशों से हथियार आयात करने के मामले में भारत का नंबर सऊदी अरब के बाद दूसरा था। दुनियाभर के कुल आर्म्‍स इम्‍पोर्ट में भारत का हिस्‍सा 9.2% है। इससे अंदाजा लगाइए कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे देशों पर कितना निर्भर है। इसी निर्भरता को कम करने के लिए यह फैसला किया गया है।

रक्षा मंत्रालय ने जिन 101 उत्‍पादों की लिस्‍ट जारी की है, उनमें सामान्‍य उपकरणों से लेकर हाई-एंड इक्विपमेंट्स तक शामिल हैं। इस लिस्‍ट का मकसद भारतीय डिफेंस इंडस्‍ट्री को यह जताना है कि सेनाओं को किन-किन चीजों की जरूरत है ताकि वह खुद को इसके लिए तैयार कर सकें। रक्षा मंत्रालय ने अगले 6-7 साल में घरेलू इंडस्‍ट्री को करीब 4 लाख करोड़ रुपये के ठेके देने की योजना बनाई है।

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यह लिस्‍ट अचानक ही तैयार नहीं हुई, इसके पीछे कई दौर की बातचीत है। सेना, नौसेना, वायुसेना के अलावा डीआरडीओ, डिफेंस पीएसयू, ऑर्डिनेंस फैक्‍ट्री बोर्ड और प्राइवेट इंडस्‍ट्री से भी कंसल्‍ट किया गया है। यानी पूरी तैयारी के बाद ही यह कदम उठाया गया है। देश में किन आर्म्‍स, इक्विपमेंट्स और प्‍लैटफॉर्म्‍स का प्रॉडक्‍शन तेजी से हो सकता है, इसकी जानकारी करने के बाद ही लिस्‍ट बनाई गई है ताकि फैसले से भारत की रक्षा क्षमता प्रभावित न हो।

बता दें कि पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल पर तनाव बरकरार है। कुछ फ्रिक्‍शन पॉइंट्स से चीनी सेना पीछे हटी है मगर देपसांग और पैंगोंग त्‍सो में टस से मस होने को तैयार नहीं। दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्‍तर पर कई दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद, शनिवार को मेजर-जनरल स्‍तर की बातचीत शुरू हुई है। भारत ने साफ कहा कि देपसांग से चीन को अपने सैनिक वापस बुलाने होंगे।

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