महाराष्ट्र में ‘इस्तीफा सियासत’

न्यूज़ डेस्क

इस बार महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव से लेकर सरकार बनाने तक कई सियासी ड्रामे हुए। सरकार बनाने को लेकर कई सारे गठजोड़ हुए। किसी तरह एनसीपी, कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना ने सरकार बना ली। लेकिन सरकार बनाने के बाद भी रार थम नहीं रहा है। इसका नतीजा विधायक के इस्तीफे में बदल रहा है।

दरअसल उद्धव ठाकरे सरकार में अभी मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था जिसके बाद से बगावत के सुर उठने लगे। अब महाराष्ट्र के जालाना से कांग्रेस विधायक कैलाश गोरंट्याल ने इस्तीफा दे दिया है। गोरंट्याल कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज थे।

अपना इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि मैंने पार्टी अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया है। मैं तीसरी बार विधयाक चुना गया हूं और मैंने अपने लोगों के लिए काम किया है। फिर भी मुझे मंत्री नहीं बनाया गया।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद से विधायकों में असंतोष दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस में असंतोष का पहला सुर पुणे से सुनने को मिला था। यहां के विधायक संग्राम थोपटे के समर्थकों ने कांग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ की, क्योंकि उन्हें मंत्री पद नहीं दिया गया। थोपटे के समर्थकों ने कांग्रेस आलाकमान को पत्र लिखा है, जबकि कुछ ने पार्टी के प्रति विद्रोही रवैया दिखाया है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे इन लोगों से पार्टी के भीतर कर्नाटक जैसे किसी प्रकार के विद्रोह को खत्म करने के लिए बात करेंगे।

बढ़ रहे रोष के बाद कुछ विधायकों ने कहा था कि वे स्थिति से अवगत कराने के लिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलेंगे। हालांकि नई दिल्ली के हस्तक्षेप से परिणाम यह हुआ है कि प्रणीति शिंदे ने पार्टी के साथ किसी तरह के मतभेद से इनकार किया है और वहीं संग्राम थोपटे ने कहा है कि वह पार्टी के साथ हैं।

बता दें कि 12 कांग्रेस नेताओं को कैबिनेट में जगह मिली है और कुछ प्रमुख विभागों पर नजर है। स्पीकर के पद के अलावा, पार्टी को एक नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करना है, क्योंकि बालासाहेब थोरात को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, जो स्पीकर के पद के लिए सबसे आगे थे, को अब अगले राज्य कांग्रेस प्रमुख के रूप में चुना जा रहा है। एक अन्य पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण अब उद्धव ठाकरे कैबिनेट का हिस्सा हैं।

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