‘रैमन मेग्सेसे अवॉर्ड’ पाने के लिए जर्नलिज्म जरुरी है क्या ?

न्यूज़ डेस्क।

साल 2019 के लिए रैमन मेग्सेसे अवॉर्ड की घोषणा हुई, जिसमें रवीश का नाम भी शामिल है। रवीश कुमार को यह सम्‍मान दिए जाने की घोषणा के बाद से उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर बधाई दी जा रही है. साथ ही ट्विटर पर #RamonMagsaysayAward और #RavishKumar ट्रेंड कर रहा है. इस पर कई तरह के मीम्स भी शेयर किए जा रहे हैं.

अशोक यादव नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि, जब बाकी पत्रकार “कमल” थामने लगे तो भी रविश कुमार कलम थामे रहे.. बिना डरे, बिना थके, लगातार.. उनके रेमन मैग्सेसे अवार्ड के लिए देश को ढेरों बधाई!

एक यूजर ने लिखा, सत्य मेव जयते #RavishKumar देश क़े लोकतंत्र क़े पिलर को ध्वस्त होने से बचाने की लड़ाई लड़ रहे कुछ जीवित बचे पत्रकारो में से एक है. जो पुरस्कार आपको मिला है वो नोबल पुरस्कार से कहीँ भी कम नही

वहीं एक अन्य यूजर ने मीम्स शेयर करते हुए अन्य टीवी चैनल के एंकरों पर तंज कसा

बता दें कि पत्रकारिता के क्षेत्र में रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड आज से करीब 12 साल पहले दिया गया था। साल 2007 में पत्रकार पी साईनाथ को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। पी साईं को पत्रकारिता के क्षेत्र में अहम योगदान के लिए यह अवॉर्ड दिया गया था। इससे पहले भी कई बार पत्रकारिता के क्षेत्र में रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड दिया गया है। इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, अरुणा रॉय और संजीव चतुर्वेदी समेत कई भारतीयों को मिला है।

बताते चले कि रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड एशिया की उन संस्थाओं और व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने अपने क्षेत्र में विशेष तौर पर उल्लेखनीय कार्य किए हों। यह अवॉर्ड फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमन मैग्सेसे की याद में दिया जाता है।

रवीश के अलावा 2019 का मैग्सेसे अवॉर्ड म्यांमार के को स्वे विन, थाईलैंड के अंगखाना नीलापाइजित, फ़िलीपीन्स के रेमुन्डो पुजांते और दक्षिण कोरिया के किम जोंग-की को भी मिला है।

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