चुनाव के चौसर पर केजरीवाल का मास्टर स्ट्रोक

हेमेन्द्र त्रिपाठी

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल इस समय चुनावी मोड में चल रहे है और हर फैसले में कही न कहीं जनता का दिल जीतने की कोशिश कर रहे है। चाहे बात करें महिलाओं को बस और मेट्रो में फ्री यात्रा की सुविधा देने या फिर दिल्ली में सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यक की संख्या बढ़ाने या फिर भोजपुरी और मैथिलि भाषा को सम्मान दिलाने के लिए हो।

केजरीवाल सरकार के उठाये गये इस कदम को बारीकी से देखा जाए तो इसमें विधान सभा चुनाव की तैयारियों की झलक नजर आती है।

विधानसभा की इसी चुनावी चौसर पर अरविन्द केजरीवाल ने मास्टर स्ट्रोक चला है। दरअसल केजरीवाल सरकार ने 200 तक बिजली का बिल माफ़ कर दिया है। अब दो सौ यूनिट के ऊपर लोगों को बिजली का बिल देना होगा। ये छूट आज से लागू होगी।

इसके अलावा उन्होंने फिक्स चार्ज को भी कम कर दिया है। केजरीवाल ने कहा कि 2013 से पहले 200 यूनिट के लिए 900 रुपया देना पड़ता था। अब 200 यूनिट के लिए कोई पैसे नहीं देने होंगे। इसके साथ ही पूरे देश में दिल्ली में सबसे सस्ती बिजली मिलेगी।

माना जा रहा है कि ‘बिजली’ की चाल चलकर अरविन्द केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव से पहले विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया है। आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में महंगे बिजली को चुनावी मुद्दा बनाकर ही अरविन्द केजरीवाल दिल्ली की सल्तनत पर कब्ज़ा किया था।

केजरीवाल ने कहा कि पहले रेट अनाप-शनाप बढ़ते थे। ब्लैक आउट के हालात थे। लोग बिजली के तारों से परेशान थे पावर कट खूब होते थे। लेकिन हमारी कड़ी मेहनत और साफ नियत के कारण बिजली के बिलों में भारी गिरावट आई है। पूरे देश में बिजली का रेट बढ़ा और दिल्ली में रेट कम हुआ।

दिल्ली की बिजली कंपनियों का घाटा कम हुआ है, उनके पास पैसा है और उनकी हालत में सुधार हुआ है। इसके अलावा पूरी दिल्ली में 24 घंटे बिजली का इंतजाम किया है। अब पावर कट लगने बंद हो गए हैं।

महिलाओं को मेट्रो और बस में मुफ्त सफ़र का तोहफा

इससे पहले सीएम अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं को तोहफा देते हुए दिल्ली मेट्रो और दिल्ली परिवहन निगम की बसों में मुफ्त सफर का एलान किया है। उन्होंने कहा था कि इस बाबत सब्सिटी किसी पर थोपी नहीं जाएगी।

कुछ महिलाएं अपनी आर्थिक समस्याओं के चलते मेट्रो में सफर नहीं कर पाती हैं। इस नियम के लागू होने के बाद से ऐसी महिलाएं भी मेट्रो व बसों में सफर कर सकेंगी। उन्होंने बताया था कि इस योजना पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी।

सरकारी विभागों में अल्पसंख्यकों की गिनती

इसके बाद सीएम अरविंद केजरीवाल सरकार ने अपने अधीन आने वाले सरकारी विभागों में अल्पसंख्यकों की गिनती शुरू कराने के आदेश दिए है। सरकार के समाज कल्याण विभाग ने सभी विभागों को अपने यहां कार्यरत अल्पसंख्यक कर्मचारियों का ब्यौरा भेजने को कहा है।

इससे अल्पसंख्यक आयोग को उपलब्ध कराया जा सके। इसकी गिनती कराने के पीछे कोई और मंशा नहीं बल्कि सरकारी विभागों में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व का पता लगाना है।

मैथिलि भाषा को सम्मान दिलाने का फैसला

दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने मैथिलि भाषा को सम्मान दिलाने और स्कूलों में वैकल्पिक विषय के तौर पर लागू करने जा रही है सरकार के इस फैसले से दिल्ली में रहने वाले लाखों पूर्वांचलियों की भावनाओं का सम्मान मिला है।

इसके अलावा भोजपुरी भाषा को भी अन्य 22 भाषाओं की तरह देश के संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह दिलाने की बात भी केंद्र सरकार से करी है। इस फैसले से दिल्ली में रहने वाले लाखों पूर्वांचली भाइयों के बीच खुशी कि एक लहर सी है। पूर्वांचल समाज और मिथिला वासी इस सम्मान के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी का आभारी है।

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