जुबिली स्पेशल डेस्क
देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। पिछले दस वर्षों में भारत भर में करीब 93 हजार से अधिक स्कूल बंद हो चुके हैं। यह खुलासा संसद में उस समय हुआ जब केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब दिया। यह सवाल राजस्थान के सीकर से सीपीआई(एम) सांसद अमरा राम ने उठाया था।
संसद में पेश किए गए आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि स्कूल बंद होने का सबसे बड़ा दौर दशक की शुरुआत में ही देखने को मिला।
2014 से 2020 के बीच सबसे ज्यादा स्कूलों पर लगा ताला
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 से 2019-20 के बीच हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। इन छह वर्षों में ही देशभर में 70 हजार से ज्यादा स्कूल बंद कर दिए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
कोरोना काल और उसके बाद के वर्षों में यानी 2020-21 से 2024-25 के बीच भी यह सिलसिला थमा नहीं। इस दौरान करीब 18,700 स्कूल बंद हुए। भले ही रफ्तार कुछ कम हुई हो, लेकिन स्कूल बंद होने की प्रक्रिया जारी रही।
उत्तर प्रदेश सबसे आगे, मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे ऊपर रहा। यहां करीब 24,600 स्कूल बंद हुए, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर आता है, जहां लगभग 22,400 स्कूलों पर ताला लगा।
इसके अलावा ओडिशा, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों में भी हजारों स्कूल बंद हुए।
- झारखंड: 5,000 से ज्याद
- ओडिशा: करीब 5,400
- राजस्थान: ढाई हजार से अधिक
महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में भी सैकड़ों से लेकर हजार से ज्यादा स्कूल बंद होने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल में कुल स्कूलों की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद करीब एक हजार स्कूल कम हो गए।
जम्मू-कश्मीर में भी चिंताजनक हालात
हाल के वर्षों यानी 2020-21 से 2024-25 की बात करें तो मध्य प्रदेश एक बार फिर सबसे आगे रहा, जहां करीब 6,900 स्कूल बंद किए गए।
जम्मू-कश्मीर में हालात और भी चिंताजनक रहे, जहां करीब 4,400 स्कूल बंद हो गए।
इस अवधि में ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी एक हजार से ज्यादा स्कूलों पर असर पड़ा, जबकि महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में भी सैकड़ों स्कूल बंद हुए।
ग्रामीण और गरीब बच्चों पर सबसे ज्यादा असर
इन आंकड़ों ने कई राज्यों की शिक्षा नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में स्कूल बंद होने को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। हालांकि, कई राज्य सरकारें इन आंकड़ों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करतीं।
वहीं शिक्षा से जुड़े एक्टिविस्ट और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह कदम एंटी-एजुकेशन है। उनका आरोप है कि स्कूलों का बंद होना खासतौर पर ग्रामीण इलाकों और गरीब तबके के बच्चों के लिए शिक्षा के रास्ते और मुश्किल बना रहा है।
सरकार के लिए चेतावनी हैं ये आंकड़े
संसद में रखे गए ये आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि अब सरकार और शिक्षा व्यवस्था को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना होगा। स्कूल बंद होने के कारणों की गहराई से जांच जरूरी है, ताकि भविष्य में इसका सीधा बोझ बच्चों की पढ़ाई और देश के शैक्षणिक भविष्य पर न पड़े।
Jubilee Post | जुबिली पोस्ट News & Information Portal
