जुबिली स्पेशल डेस्क
साल 2025 को अगर ‘युद्ध का साल’ कहा जाए, तो यह गलत नहीं होगा। एक के बाद एक कई देश संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता की आग में झुलसते रहे।
अफसोस यह है कि नया साल 2026 भी राहत लेकर नहीं आया। साल की शुरुआत ही तनाव, टकराव और अनिश्चितता के साथ हुई है।
कहीं सरकारों के खिलाफ सड़कों पर गुस्सा उबल रहा है, तो कहीं चुनाव से पहले ही हालात बेकाबू हो चुके हैं। मध्य पूर्व से लेकर दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका तक हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं।
ईरान में सत्ता विरोधी आंदोलन, बांग्लादेश में चुनावी हिंसा, यमन में गहराता गृह युद्ध, रूस-यूक्रेन की जारी जंग और वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमले इन सबने साफ कर दिया है कि 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए बेचैनी और संकट का संदेश लेकर आई है।
वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमले, मादुरो को पकड़ने का दावा
2026 की शुरुआत को अभी तीन दिन ही हुए थे कि अमेरिका ने वेनेज़ुएला पर बड़ा सैन्य हमला कर दिया। शनिवार को राजधानी कराकस समेत मिरांडा, अरागुआ और ला ग्वायरा में कुल सात हवाई हमले किए गए।
इस बात की पुष्टि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद की। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कम ऊंचाई पर उड़ते हेलिकॉप्टर दिखाई दिए, जबकि हमलों के बाद कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई।
वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इसे तख्तापलट की साजिश बताते हुए पूरे देश में आपात स्थिति घोषित कर दी। मादुरो का आरोप है कि अमेरिका वेनेज़ुएला के तेल और खनिज संसाधनों पर कब्ज़ा करना चाहता है। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि हमलों के बाद मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़कर देश से बाहर ले जाया गया है।
ईरान में सत्ता के खिलाफ सड़कों पर उबाल
ईरान में महंगाई और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन सातवें दिन भी जारी हैं। अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है।
हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि मारे गए प्रदर्शनकारियों के अंतिम संस्कार के दौरान भी खुलकर ‘डेथ टू खामेनेई’ के नारे लगाए जा रहे हैं।
प्रदर्शन अब केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहे, बल्कि शिया धर्मगुरुओं के गढ़ माने जाने वाले पवित्र शहर कोम तक फैल चुके हैं।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, कड़ी सुरक्षा के बावजूद प्रदर्शनकारी राजशाही के समर्थन और इस्लामिक शासन के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

बांग्लादेश में चुनाव से पहले हिंसा, अल्पसंख्यक निशाने पर
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने हैं, लेकिन उससे पहले ही देश हिंसा की चपेट में आ गया है। संकट की शुरुआत दिसंबर 2025 में छात्र नेता उस्मान हादी की मौत से हुई, जिसके बाद आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा का सिलसिला शुरू हो गया।
सबसे गंभीर स्थिति अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को लेकर है। हाल ही में हमले में घायल हुए 50 वर्षीय हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की अस्पताल में मौत हो गई। इससे पहले दीपू दास, अमृत मंडल और बिजेंद्र बिस्वास की हत्या हो चुकी है। अब तक चार हिंदुओं की जान जा चुकी है, जिससे समुदाय में दहशत का माहौल है।

यमन में फिर बढ़ा तनाव
यमन का गृह युद्ध साल 2014 से जारी है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्ज़ा किया था। 2015 में हूतियों को सत्ता से हटाने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व में सैन्य गठबंधन बना, लेकिन संघर्ष थम नहीं सका।
अब इस युद्ध में खाड़ी देशों की आपसी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। हालात तब बिगड़े जब सऊदी अरब ने हवाई हमला किया।
सऊदी का दावा है कि यह हमला उस हथियार खेप पर किया गया, जो यूएई समर्थित अलगाववादी गुट सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को भेजी जा रही थी।
इस नए तनाव का सबसे बड़ा खामियाजा एक बार फिर यमन की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जो पहले ही युद्ध, भूख और मानवीय संकट से जूझ रही है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और खतरनाक मोड़ पर
2026 में रूस-यूक्रेन युद्ध को चार साल पूरे होने वाले हैं, लेकिन शांति की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हुई हैं। नए साल की शुरुआत में यह संघर्ष और तेज हो गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के घर पर हमले के दावों के बाद तनाव और बढ़ गया है।
मॉस्को का कहना है कि यूक्रेन अब राजधानी और अहम ठिकानों को सीधे निशाना बना रहा है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति के नेतृत्व में युद्ध समाप्त कराने की कोशिशें कितनी कारगर साबित होती हैं।
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