बंधना था सेहरा, लिपट गया तिरंगा 

माता-पिता बच्चों के पैदा होने के बाद से उनके शादी के सपने संजोने लगते हैं। शादी के कुछ महीनों पहले से ही तैयारियों में जुट जाते हैं। शादी में कोई अपशगुन या गड़बड़ी ना हो इसके लिए हर काम सावधानी से करते हैं, मंगल कार्यों में अनहोनी न हो इसके लिए सतर्क रहते हैं। ऐसे में अगर वहीं ना रहे जिसके लिए इतने जतन किये जा रहे है तो इससे बड़ी विडंबना उस परिवार के लिये और क्या होगी?
कुछ ऐसा ही माहौल आज मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट के घर है। जहां उन्हें घोड़ी चढ़ते देखने के लिये बेताब निगाहे उनके पार्थिव देह का इंतजार कर रही थी। मेजर चित्रेश की आगामी सात मार्च को शादी होनी थी। पूरा परिवार शादी की तैयारी कर रहा था लेकिन किस्मत ने कुछ ऐसा मोड़ लिया की वे सभी लोग रविवार को मेजर के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। खुशियों का शोरगुल दुखी परिजनों के करुण क्रंदन में बदल गया। मेजर बिष्ट 28 फरवरी को अपनी शादी के लिए घर आने वाले थे लेकिन अब आया उनका पार्थिव शरीर।
जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा के पास आईईडी निष्क्रिय करते समय मेजर बिष्ट (31) शहीद हो गये। मेजर विष्ट नौशेरा सेक्टर में बम निरोधक दस्ते की अगुआई कर रहे थे, जब आईईडी में विस्फोट हुआ। शहादत के अगले दिन मेजर के पार्थिव देह को नेहरू कॉलोनी स्थित उनके आवास पर ले जाया गया।
उनके पिता सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक एस.एस. बिष्ट ने कहा की अजीब विडंबना है। वह शादी के लिए घर आने वाला था। अब हम उसके पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे हैं। मेजर के पिता पहले ही अपने बेटे की शादी के ज्यादातर कार्ड बांट चुके थे और इसी महीने शादी के लिए रिश्तेदारों को आमंत्रित करने अपने गांव पीपली गए थे।  मेजर चित्रेश के परिजन और पड़ोसी उन्हें इंजीनियरिंग कॉर्प्स का बहादुर और ईमानदार अधिकारी बुलाते थे।
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