जीरो टॉलरेंस : सात माह में 23 हजार से अधिक अपराधियों को मिली गुनाहों की सजा

  • बिना गोली और हथियार के यूपी पुलिस का अभियोजन निदेशालय अपराधियों को कर रहा ढेर
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति का दिख रहा असर
  • एनकाउंटर के दौरान ही नहीं, न्यायालय में भी यूपी पुलिस अपराधियों से ले रही लोहा

लखनऊ. योगी सरकार प्रदेश में जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराध और अपराधियों की कमर तोड़ रही है। यूपी पुलिस जहां एक तरफ सीधा मुकाबला करते हुए अबतक 194 से अधिक बदमाशों को ढेर कर चुकी है, वहीं बड़ी संख्या ऐसे अपराधियों की भी है, जिन्हें न्यायालय में पुलिस की प्रभावी पैरवी से बेदम कर दिया गया है।

यूपी पुलिस का अभियोजन निदेशालय इसमें अहम रोल अदा कर रहा है। पिछली सरकारों में जहां अभियोजन निदेशालय हाशिये पर रहता था, वहीं योगी सरकार ने इसे खास तरजीह दी है।

अभियोजन निदेशालय के एडीजी दीपेश जुनेजा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जुलाई-23 में प्रदेश के अपराधियों को कोर्ट में प्रभावी पैरवी और शत-प्रतिशत गवाहों की गवाही कराकर अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिये थे। इसके तहत अपराधियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए 1 जुलाई से ऑपरेशन कन्विक्शन चलाया गया।


योगी सरकार ने कोर्ट में प्रभावी पैरवी के जरिये 1 जुलाई से 25 जनवरी तक सनसनीखेज हत्या के 844 मामलों, बलात्कार के 260 मामलों, डकैती के 50 मामलों, लूट के 208 मामलों, चोरी के 1001, गृह भेदन के 89 मामलों, अन्य सनसनीखेज अपराध के 1075 मामलों, वाहन चोरी के 116 मामलों और अन्य प्रकरण के 12,532 मामलों में अपराधियों को सजा दिलायी गई।

वहीं ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रदेश के आठ जिलों और दो कमिश्नरेट पुलिस ने अपराधियों को सजा दिलाने में सबसे अच्छा प्रदशर्न किया।

इसमें बाराबंकी पुलिस ने सबसे अधिक 714 अपराधियों को सजा दिलायी जबकि कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने 673 अपराधियों, सहारनपुर ने 538 अपराधियों, मुरादाबाद ने 519 अपराधियों, बिजनौर ने 479 अपराधियों, मुजफ्फनगर ने 457 अपराधियों, मेरठ ने 451 अपराधियों, बुलंदशहर ने 441 अपराधियों और कमिश्नरेट आगरा ने 349 अपराधियों को सजा दिलायी।

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