सीएम योगी के पिता का निधन

न्‍यूज डेस्‍क

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट का सोमवार सुबह दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान निधन हो गया। एम्स के मुताबिक, सुबह 10.45 पर सीएम योगी के पिता ने अंतिम सांस ली। अब शव को पैतृक गांव पंचूर (उत्तराखंड) ले जाया जाएगा। इसकी तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि शव सोमवार को ही उन्हें उत्तराखंड ले जाया जाएगा।

बीच मीटिंग में योगी को दी गई जानकारी

जब पिता का निधन हुआ, उस वक्‍त योगी आदित्‍यनाथ लखनऊ में थे। वे अपनी कोर टीम के साथ लॉकडाउन में ढील और आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, इसी मीटिंग के बीच उन्‍हें यह दुखद समाचार दिया गया। मगर वह विचलित नहीं हुए और बैठक पूरी करने के बाद ही उठे। मीटिंग में उन्‍होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोटा से लौटे बच्‍चों का होम क्‍वारंटीन में रहना सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही उनके मोबाइल में Aarogya Setu ऐप डाउनलोड कराने के बाद ही उन्‍हें घर भेजा जाए।

वहीं सीएम योगी ने पिता के निधन पर राज्‍यपाल आनंदीबेन पटेल ने दुख व्‍यक्‍त किया है। राज्‍यपाल ने ईश्‍वर से दिवंगत आत्‍मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्‍त परिजनों के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त की है।

मिली जानकारी के मुताबिक, एम्स में भर्ती यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट को किडनी और लिवर की समस्या थी।बताया जा रहा है कि आनंद सिंह बिष्ट की तबीयत खराब होने पर उन्हें पिछले महीने मार्च में एम्स में भर्ती कराया गया था। एक महीने से भी अधिक समय से यहां गेस्ट्रो विभाग के डॉक्टर विनीत आहूजा की टीम उनका इलाज कर रही थी।

एयर एंबुलेंस से लाए गए थे दिल्ली

मिली जानकारी के मुताबिक, 89 वर्षीय आनंद सिंह बिष्ट की हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें उत्तराखंड में पौड़ी- गढ़वाल जिले के यमकेश्वर के ग्राम पंचूर से एयर एंबुलेंस के जरिये दिल्ली के एम्स में लाया गया था।

बताया जा रहा है कि रविवार को उनकी अचानक तबीयत फिर से खराब हो गई। इसके बाद से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। इससे पहली तबीयत खराब होने पर उन्होंने पौड़ी-गढ़वाल जिला स्थित जॉलीग्रांट के हिमालयन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार नहीं होने के बाद एयर एंबुलेंस के जरिये दिल्ली ले लाया गया।

गौरतलब है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट बतौर फॉरेस्ट रेंजर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद से वह अपने पैतृक गांव में रह रहे थे।

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