“सीजफायर को लेकर ईरान को क्यों हुआ कन्फ्यूजन?”जेडी वेंस ने कैसे दूर किया भ्रम

जुबिली न्यूज डेस्क
जेडी वेंस ने अमेरिका-ईरान सीजफायर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि लेबनान इस समझौते का हिस्सा नहीं है, जबकि इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति बन गई थी। वेंस ने बुडापेस्ट में मीडिया से बातचीत में साफ किया कि यह युद्धविराम सीमित दायरे में लागू है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्तों के सीजफायर को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे थे।
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि यह समझौता लेबनान पर भी लागू होगा, लेकिन अब अमेरिका ने इसे खारिज कर दिया है।
“गलतफहमी की वजह से बढ़ा विवाद”
जेडी वेंस के मुताबिक, ईरान को यह गलतफहमी हो गई थी कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका का मकसद अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, न कि पूरे क्षेत्र में युद्धविराम लागू करना।
किन देशों पर फोकस है समझौता?
वेंस ने बताया कि यह सीजफायर खासतौर पर इन देशों पर केंद्रित है:
- इजरायल
- खाड़ी के अरब देश
इससे साफ है कि समझौता एक व्यापक क्षेत्रीय शांति के बजाय रणनीतिक सुरक्षा पर आधारित है।
इजरायल-लेबनान मोर्चे पर क्या स्थिति?
इजरायल ने संकेत दिया है कि वह लेबनान में अपने ऑपरेशन को पूरी तरह बंद नहीं करेगा। हालांकि, उसने कुछ हद तक संयम बरतने की बात कही है।इससे यह स्पष्ट होता है कि लेबनान में तनाव फिलहाल जारी रह सकता है।
पहले भी आए थे अलग-अलग बयान
इससे पहले शहबाज़ शरीफ़ ने दावा किया था कि सीजफायर लेबनान पर भी लागू होगा। वहीं इजरायल ने आधिकारिक तौर पर इस बात से इनकार किया था, जिससे स्थिति और भ्रमित हो गई थी।
मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता
मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं।
- लेबनान में संघर्ष जारी रहने की आशंका
- अमेरिका-ईरान वार्ता पर असर
- इजरायल की सैन्य रणनीति पर नजर
अमेरिका के ताजा बयान से साफ हो गया है that US-Iran ceasefire एक सीमित समझौता है और इसमें लेबनान शामिल नहीं है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में शांति की स्थिति अभी अधूरी है और आने वाले दिनों में हालात और बदल सकते हैं।



