समाजवादी पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव से अपने कदम क्यों पीछे खींचे

जुबिली स्पेशल डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश से बाहर अपने विस्तार में जुटी समाजवादी पार्टी ने हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उनके इस कदम को कांग्रेस भी सही कहेंगी। दरअसल सपा ने हरियाणा विधान सभा चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारने का बड़ा फैसला किया है।

उनके इस फैसले से कांग्रेस ने राहत की सांस ली है क्योंकि हरियाणा विधान सभा चुनाव में मुख्य मुकाबला अब बीजेपी बनाम कांग्रेस का है और ऐसे में सपा ने प्रत्याशी नहीं उतारने से वोट नहीं कटेंगा। अखिलेश यादव ने इसको लेकर शुक्रवार को कहा कि बात दो-चार सीटों पर प्रत्याशी उतारने की नहीं है, बात जनता के दुख-दर्द को समझते हुए उनको बीजेपी की सियासत से मुक्ति दिलाने की है।

इसके लिए सपा हर त्याग के लिए तैयार है और बीजेपी को हराने के लिए हरियाणा चुनाव में इंडिया गठबंधन का साथ देंगे। अखिलेश यादव के इस फैसले से अब देखना होगा कि क्या यूपी में कांग्रेस सपा के लिए त्याग करेंगी।उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं।

ट्वीट करके कहा कि बात सीट की नहीं बल्कि बीजेपी को हराने की है. हम मानते हैं कि हमारे या इंडिया गठबंधन के किसी भी घटक दल के लिए, यह समय अपनी राजनीतिक संभावना तलाशने का नहीं, बल्कि त्याग और बलिदान देने का है. हरियाणा के हित में सपा बड़े दिल से हर त्याग के लिए तैयार हैं. बीजेपी को हराने में इंडिया गठबंधन के साथ अपने संगठन और समर्थकों की शक्ति को जोड़ देंगे।

बता दें कि हरियाणा विधान सभा चुनाव में कांग्रेस अपनी जीत का दावा कर रही है। वहीं बीजेपी को लगातर झटके लग रहे हैं। कई पुराने नेताओं का टिकट काट दिया गया है। इस वजह से कई नेताओ ंने पार्टी छोड़ दी है और इस वजह से बीजेपी को बड़ा नुकासान होने की बात कही जा रही है।

 

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