नेहरू मेमोरियल ने राहुल को क्यों लिखा पत्र

जुबिली स्पेशल डेस्क

नेहरू मेमोरियल के सदस्य इतिहासकार रिजवान कादरी ने  राहुल गांधी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने जवाहर लाल नेहरू से जुड़े दस्तावेजों के ’51 डिब्बे’ लौटाए जाने की मांग की है।

हालांकि अभी तक इस मामले में राहुल गांधी या फिर सोनिया गांधी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। बता दें कि ये दस्तावेज सोनिया गांधी के पास रखे हुए हैं। अब इसे वापस करने के लिए बोला गया है।

उन्होंने लिखा, ‘मैं आज आपको प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) के बारे में लिख रहा हूं, जिसे पहले नेहरू स्मारक संग्रहालय एवं पुस्तकालय (एनएमएमएल) के नाम से जाना जाता था।

जैसा कि आप जानते हैं, पीएमएमएल भारत के आधुनिक और समकालीन इतिहास को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष भी शामिल है।

जवाहरलाल नेहरू स्मारक निधि ने 1971 में जवाहरलाल नेहरू के प्राइवेट पेपर्स उदारतापूर्वक पीएमएमएल को ट्रांसफर कर दिए थे। ये दस्तावेज भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण कालखंड के बारे में अमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘साल 2008 में तत्कालीन यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के अनुरोध पर इन दस्तावेजों का एक संग्रह पीएमएमएल से वापस ले लिया गया था।

हम समझते हैं कि ये दस्तावेज नेहरू परिवार के लिए व्यक्तिगत महत्व रखते होंगे. हालांकि, पीएमएमएल का मानना ​​है कि इन ऐतिहासिक सामग्रियों में जयप्रकाश नारायण, पद्मजा नायडू, एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली, विजय लक्ष्मी पंडित, बाबू जगजीवन राम और गोविंद बल्लभ पंत जैसी हस्तियों के साथ पत्राचार शामिल हैं. इन पत्राचार से शोधकर्ताओं को बहुत लाभ होगा. संभावित समाधानों की खोज में आपके सहयोग के लिए हम आभारी होंगे।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘साल 2008 में तत्कालीन यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के अनुरोध पर इन दस्तावेजों का एक संग्रह पीएमएमएल से वापस ले लिया गया था. हम समझते हैं कि ये दस्तावेज नेहरू परिवार के लिए व्यक्तिगत महत्व रखते होंगे।’

हालांकि, पीएमएमएल का मानना ​​है कि इन ऐतिहासिक सामग्रियों में जयप्रकाश नारायण, पद्मजा नायडू, एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली, विजय लक्ष्मी पंडित, बाबू जगजीवन राम और गोविंद बल्लभ पंत जैसी हस्तियों के साथ पत्राचार शामिल हैं।’ इन पत्राचार से शोधकर्ताओं को बहुत लाभ होगा. संभावित समाधानों की खोज में आपके सहयोग के लिए हम आभारी होंगे।’’

Related Articles

Back to top button