पुलवामा हमले के पीछे के असली गुनाहगार कौन?

न्यूज डेस्क

कश्मीर घाटी में तैनात डीएसपी देविंदर सिंह की दो आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद इस पर राजनीति तेज हो गई है। लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पुलवामा हमले की नए सिरे से जांच की मांग की।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने ट्विटर पर भी पुलवामा के असली गुनहगार को सामने लाने की मांंग की है। ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर इत्तेफाक से देविंदर सिंह का नाम देविंदर खान होता तो आरएसएस की ट्रोल रेजीमेंट की प्रतिक्रिया ज्यादा तीखी और मुखर होती। वर्ण, मत और संप्रदाय से इतर देश के दुश्मनों की निंदा होनी चाहिए।’

उन्होंने आगे लिखा है कि ‘घाटी में इस कमजोरी का खुलासा हुआ है वो हमें परेशान करने वाली है।’  कांग्रेस नेता ने कहा, ‘अब सवाल यह पैदा होता है कि पुलवामा हमले के पीछे के असली गुनाहगार कौन हैं? इस मामले पर नए सिरे से जांच की जरूरत है।’

गौरतलब है कि डीएसपी देविंदर सिंह को हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों के साथ एक कार से गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में देविंदर ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। खबरों के मुताबिक डीएसपी ने माना है कि उसने 12 लाख रु में आतंकियों को दिल्ली पहुंचाने की डील की थी। खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकियों की योजना गणतंत्र दिवस के दौरान हमला करने की थी।

इसके अलावा जांच में यह बात भी सामने आई है कि यह पुलिस अधिकारी आतंकवादियों से पैसे लेकर उन्हें बनिहाल सुरंग पार कराता था। वह खुद गाड़ी में इसलिए बैठा रहता था ताकि रास्ते में कोई रोक-टोक न हो। शुरुआती जांच से पता चला है कि डीएसपी ने कम से कम पांच बार आतंकियों को बनिहाल सुरंग पार कराने और उनके जम्मू में रहने का बंदोबस्त करने के बदले पैसे वसूले हैं।

मालूम हो कि राष्ट्रपति मेडल पा चुके देविंदर सिंह का नाम 2001 के संसद हमला मामले में भी सामने आया था। इसमें दोषी साबित हुए अफजल गुरु ने उसका जिक्र करते हुए अपने वकील को एक चिट्ठी  लिखकर सनसनीखेज आरोप लगाए थे।

अफजल के मुताबिक देविंदर सिंह ने उसे टॉर्चर करके उससे पैसे वसूले थे और संसद हमले में शामिल मोहम्मद नाम के एक आतंकी

के साथ उसे दिल्ली भेजा था। अफजल गुरु के मुताबिक देविंदर सिंह ने उससे इस आतंकी के लिए दिल्ली में किराए पर घर लेने और उसके लिए कार का इंतजाम करने को कहा था। एक बार फिर इस चिट्ठी  की चर्चा होने लगी है।

यह भी पढ़ें :तेजी से गर्म हो रहे हैं महासागर

यह भी पढ़ें : गैरराजनीतिक विरोध की मिशाल बनी शाहीनबाग की महिलाएं

 

Related Articles

Back to top button