संजय राउत ने ट्वीट के जरिए किस पर साधा है निशाना

जुबिली न्यूज डेस्क

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा तो सरकार पर भी सवाल उठा। उद्धव सरकार ने अपनी पुलिस पर भरोसा जताया तो सरकार कटघरे में आ गई। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के सुशांत केस की जांच सीबीआई को सौंपने के फैसले के बाद से महाराष्ट्र सरकार चौतरफा घिरी हुई है।

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सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों में उद्धव सरकार को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैें। इस बीच शिवसेना के
राज्यसभा सांसद व प्रवक्ता संजय राउत ने अटपटा ट्वीट किया है, जिसकी चर्चा हो रही है। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा है कि हमने बारिशों में भी, जलते हुए मकान देखे हैं।

इस ट्वीट से फिलहाल यह पता नहीं चल रहा है कि राउत का इशारा किसकी ओर है लेकिन माना जा रहा है कि सुशांत केस की सीबीआई जांच को लेकर ही यह ट्वीट किया गया है।

संजय राउत ने अपने ट्वीट में लिखा है-‘उनसे कहना कि.. किस्मत पे इतना नाज ना करे.. हमने बारिशों में भी जलते हुए मकान देखे हैं…। जय महाराष्ट्र!’

सुप्रीम कोर्ट के फैसेले से एक दिन पहले सांसद संजय राउत ने कहा था कि महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहां कानून सबसे ऊपर है।

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वहीं राउत से पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी सुशांत केस की जांच सीबीआई को सौंपने के फैसले के बाद टिप्पणी की थी। शरद पवार ने कहा कि वह आशा करते हैं कि इस केस का हाल नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले की तरह न हो जाए जिसकी जांच अभी तक पूरी नहीं हो पाई है।

वहीं जब राउत से इस पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर राजनीति करना ठीक नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला दिया है और पूरी जानकारी जब हमारे पास आएगी तो सरकार की तरफ से प्रवक्ता इस मामले में बात करेगा।’ वह कई सवालों पर चुप्पी साध गए।

सरकार की छवि खराब करने के लिए हुआ राजनीतिकरण-सामना

चारों तरफ से घिरी उद्धव ठाकरे सरकार के पक्ष में शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लेख लिखा है। सामना में लिखा है कि
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले का राजनीतिकरण मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र सरकार की छवि खराब करने के लिए हुआ है।

शिवसेना ने पूछा कि यदि पटना में दर्ज की गई एफआईआर सही थी, तो यदि मामले से संबंधित अन्य पात्र पश्चिम बंगाल में एफआईआर दर्ज करते हैं, तो क्या कोलकाता पुलिस को इसकी जांच करने का अधिकार मिल जाएगा?

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