अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए मोदी सरकार से चिदंबरम ने क्या कहा?

जुबिली न्यूज डेस्क

एक बार फिर भारत की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कांग्रेस नेता व पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मोदी सरकार को सलाह दी है।

भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए मोदी सरकार को चिदंबरम ने और करेंसी छापने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा कि भारत के पास नोटों की छपाई करने का संप्रभु अधिकार है और अगर सरकार को लगता है, तो उसे यह करना चाहिए।

उन्होंने यह बातें कांग्रेस पार्टी की एक प्रेस वार्ता में ये बात कही। अर्थव्यवस्था में 2020-21 के दौरान 7.3 प्रतिशत की गिरावट पर चिंता प्रकट करते हुए पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि अगर 2021-21 में ऐसी स्थिति से बचना है तो सरकार को अपनी गलतियां स्वीकार करते हुए विपक्ष एवं अर्थशास्त्रियों की सलाह सुननी चाहिए।

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चिदंबरम ने अर्थव्यवस्था के लिहाज से वित्त वर्ष 2021-21 को पिछले चार दशक का ‘सबसे अंधकारमय’ साल करार दिया और यह आरोप भी लगाया कि कोरोना महामारी के साथ ही सरकार के ‘अकुशल एवं अक्षम आर्थिक प्रबंधनÓ से हालात और बिगड़ गए।

उन्होंने कहा कि 2018-19 में जीडीपी 140,03,316 करोड़ थी। 2019-20 में यह 145,69,268 करोड़ रुपये थी और 2020-21 में यह घटकर 135,12,740 करोड़ रुपये हो गई। यह देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को बताता है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि, ”पिछले साल जब कोरोना महामारी की पहली लहर धीमी पड़ती नजर आयी, तो वित्त मंत्री और मुख्य आर्थिक सलाहकार अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने की बातें करने लगे। तभी हमने कहा था कि अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन पैकेज की मजबूत मदद चाहिए।”

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चिदंबरम ने कहा कि सबसे चिंता की बात ये है कि प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद एक लाख रुपये से नीचे चला गया है।

उन्होंने कहा, ”अगर 2020-21 की तरह साल 2021-22 को नहीं होने देना है तो सरकार को जागना चाहिए, अपनी गलतियां स्वीकार करनी चाहिए, अपनी नीतियां बदलनी चाहिए तथा विपक्ष एवं अर्थशास्त्रियों की सलाह स्वीकार करनी चाहिए।”

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2020-21 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 1.6 प्रतिशत रही। यह इससे पिछली तिमाही अक्तूबर-दिसंबर, 2020 में 0.5 प्रतिशत से अधिक है।

वित्त वर्ष 2019-20 की जनवरी-मार्च तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

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