वी. एस. अच्युतानंदन को मरणोपरांत पद्म विभूषण, लेकिन परिवार नहीं करेगा स्वीकार

जुबिली न्यूज डेस्क
तिरुवनंतपुरम: केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीएम के दिग्गज नेता रहे वी. एस. अच्युतानंदन को मरणोपरांत पद्म विभूषण देने की घोषणा की गई है, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि उनका परिवार इस सम्मान को स्वीकार नहीं करेगा। इसकी वजह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की वह वैचारिक नीति है, जिसके तहत पार्टी नेता सरकारी सम्मानों को स्वीकार नहीं करते।

CPM का रुख स्पष्ट, परिवार भी करेगा पालन
सीपीएम के महासचिव एम. ए. बेबी ने इस मुद्दे पर पार्टी का रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की स्पष्ट नीति है कि अच्युतानंदन के परिवार को यह सम्मान स्वीकार नहीं करना चाहिए।बेबी ने यह भी कहा कि पार्टी का मानना है कि अगर वी. एस. अच्युतानंदन जीवित होते, तो वे खुद भी इस पुरस्कार को स्वीकार नहीं करते, क्योंकि वे जीवन भर पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों पर अडिग रहे।
बेटे अरुण कुमार ने भी जताया पार्टी के फैसले पर भरोसा
वी. एस. अच्युतानंदन के बेटे वी. ए. अरुण कुमार ने भी परिवार का रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी जो फैसला लेगी, परिवार उसी के अनुसार आगे बढ़ेगा।अरुण कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पद्म विभूषण को लेकर परिवार को औपचारिक सूचना मिल चुकी है।
उन्होंने लिखा कि परिवार इसे उनके पिता के समाज के लिए लंबे योगदान की मान्यता के रूप में देखता है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि सीपीएम की वैचारिक नीति सरकारी सम्मानों को स्वीकार करने के खिलाफ है।
“लोगों के दिलों में मिला सम्मान सबसे बड़ा”
अरुण कुमार ने कहा,“एक कम्युनिस्ट के तौर पर मेरे पिता हमेशा पार्टी के सिद्धांतों पर चले। परिवार भी पार्टी के फैसले और उनके आदर्शों के साथ खड़ा रहेगा। लोगों के दिलों में उन्हें जो सम्मान मिला है, वह किसी भी सरकारी पुरस्कार से कहीं बड़ा है।”
घोषणा के वक्त जताई गई थी खुशी
गौरतलब है कि जब पद्म विभूषण की घोषणा की गई थी, उस समय परिवार और पार्टी की ओर से इस पर खुशी जाहिर की गई थी। परिवार ने इसे अच्युतानंदन के सामाजिक और राजनीतिक योगदान की मान्यता बताया था।
हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व के रुख के सामने परिवार का फैसला भी उसी दिशा में जाता दिख रहा है।
औपचारिक प्रस्ताव का इंतजार, लेकिन संकेत साफ
हालांकि सीपीएम की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रस्ताव जारी नहीं किया गया है, लेकिन पार्टी नेतृत्व के बयान और रुख से यह लगभग साफ है कि वी. एस. अच्युतानंदन के नाम घोषित पद्म विभूषण को स्वीकार नहीं किया जाएगा।



