US-Iran Ceasefire: अमेरिका-ईरान में युद्ध विराम से गदगद PAK, ‘थैंक्स गिविंग डे’ का किया ऐलान

Key Highlights
- तारीख: 10 अप्रैल को पाकिस्तान मनाएगा ‘थैंक्स गिविंग डे’
- भूमिका: अमेरिकी संदेशों को ईरान तक पहुँचाने का काम किया
- विवाद: यूएई के साथ कूटनीतिक रिश्तों में खटास
- आर्थिक संकट: 3.5 बिलियन डॉलर के कर्ज की वापसी का दबाव
इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्ध विराम (Ceasefire) ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
इस सीजफायर में ‘मैसेंजर’ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान में जश्न का माहौल है। शहबाज शरीफ सरकार ने इस सफलता को सेलिब्रेट करने के लिए शुक्रवार (10 अप्रैल) को देश भर में ‘थैंक्स गिविंग डे’ मनाने की घोषणा की है।
नवाज शरीफ ने बताया ‘बड़ी कूटनीतिक जीत’
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस समझौते को देश की बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत करार दिया है। अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios के अनुसार, पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया में एक ब्रिज (पुल) की तरह काम किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का मुख्य काम अमेरिकी संदेशों को ईरान तक सुरक्षित पहुँचाना था। जब सीजफायर का ड्राफ्ट तैयार हुआ, तो पीएम शहबाज शरीफ ने ही इसे सबसे पहले सार्वजनिक किया, जिस पर बाद में डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर ने अपनी सहमति दी।
पाकिस्तान को इस मध्यस्थता से क्या हासिल होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम केवल शांति के लिए नहीं, बल्कि अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने का एक जरिया है। इसके मुख्य फायदे निम्नलिखित हो सकते हैं:
- अमेरिका से मजबूत होते रिश्ते: ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के एक्सपर्ट कबीर तनेजा के अनुसार, पाकिस्तान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ सीधा संपर्क साधा है। ट्रंप और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के बीच हुई बातचीत से दोनों देशों के सैन्य संबंध फिर से पटरी पर आ सकते हैं।
- मुस्लिम देशों में साख: इस डील के जरिए पाकिस्तान मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देशों में अपनी मौजूदगी और प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
- डिफेंस डील और निवेश: ईरान-इजरायल और ईरान-अमेरिका तनाव के बाद कई छोटे मुस्लिम देश अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। पाकिस्तान यहाँ अपनी डिफेंस डील (जैसे सऊदी अरब के साथ की थी) के जरिए निवेश और कर्ज हासिल करने की फिराक में है।
- वैश्विक क्रेडिबिलिटी: क्विंसी इंस्टीट्यूट के एडम वेनस्टीन का मानना है कि पाकिस्तान दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि संकट के समय वह एक ‘समस्या समाधानकर्ता’ (Problem Solver) की भूमिका निभा सकता है।
कूटनीतिक जीत के बीच बढ़ी मुश्किलें: UAE हुआ नाराज
जहाँ एक तरफ पाकिस्तान जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसे अपने पुराने दोस्त संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की नाराजगी झेलनी पड़ रही है।
“यूएई के विशेषज्ञ अमजद ताहा के अनुसार, पाकिस्तान ने इस सीजफायर प्रक्रिया में यूएई को पूरी तरह अंधेरे में रखा। न तो उन्हें जानकारी दी गई और न ही उनके हितों का ध्यान रखा गया। इसे एक बड़े धोखे के तौर पर देखा जा रहा है।”
पाकिस्तान पर टूटेगा आर्थिक पहाड़?
यूएई की नाराजगी पाकिस्तान के लिए महंगी साबित हो सकती है। यूएई ने कथित तौर पर इस महीने के अंत तक अपने 3.5 बिलियन डॉलर का कर्ज लौटाने की मांग की है।
अगर यूएई अपना समर्थन खींचता है, तो पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर एक बड़ा जुआ खेला है। अब देखना यह है कि क्या यह ‘कूटनीतिक जीत’ उसे आर्थिक संकट से बाहर निकाल पाएगी या पुराने सहयोगियों की नाराजगी नई मुसीबत खड़ी करेगी।



