US-Iran Ceasefire: 40 दिन, 960 घंटे और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का अंत

वॉशिंगटन/तेहरान: 28 फरवरी 2026 को जिस ‘प्रलयंकारी’ जंग की शुरुआत हुई थी, उसका अंत एक ऐसे समझौते के साथ हुआ जिसने दुनिया को हैरान कर दिया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़ा गया ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) 40 दिनों के बाद 8 अप्रैल की सुबह सीजफायर के साथ थम गया। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इसे अमेरिका की सैन्य और कूटनीतिक हार के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप के अधूरे लक्ष्य: क्यों झुकना पड़ा अमेरिका को?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध की शुरुआत तीन बड़े लक्ष्यों के साथ की थी: ईरान में सत्ता परिवर्तन, परमाणु कार्यक्रम का खात्मा और बिना शर्त आत्मसमर्पण। लेकिन 8 अप्रैल को घोषित सीजफायर की शर्तें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं:
- सत्ता परिवर्तन में विफलता: सीजफायर के तहत अमेरिका को ईरान की वर्तमान सरकार को मान्यता देनी पड़ी है।
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान का यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेगा।
- होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): अमेरिका इसे मुक्त कराना चाहता था, लेकिन अब इस पर ईरान का नियंत्रण और टैक्स वसूलने का अधिकार बना रहेगा।
पाकिस्तान बना ‘मैसेंजर’, असीम मुनीर की मध्यस्थता
युद्ध के मैदान में जब अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों और ‘पैट्रियट’ सिस्टम का स्टॉक खत्म होने लगा, तब वाशिंगटन को एक ‘एग्जिट रूट’ की तलाश थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर और ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के बीच हुई गुप्त बातचीत ने इस सीजफायर की नींव रखी। ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट के महज 15 मिनट बाद ही अमेरिकी सेना को पीछे हटने का आदेश दे दिया गया।
सीजफायर की वो 10 शर्तें जिन्होंने बदल दी मिडिल ईस्ट की तस्वीर
ईरान ने अपनी शर्तों पर अमेरिका को झुकने पर मजबूर किया है। समझौते के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- होर्मुज पर टैक्स: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान ‘सुरक्षा टैक्स’ वसूलेगा।
- सैन्य वापसी: मिडिल ईस्ट के प्रमुख ठिकानों से अमेरिकी सेना की धीरे-धीरे वापसी।
- प्रतिबंधों में ढील: ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को कम किया जाएगा।
- तेल की कीमतें: युद्ध के दौरान तेल 220 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया था, जिसे अब स्थिर करने की कोशिश होगी।
सीजफायर के बाद ‘होर्मुज’ पर फंसा नया पेच
युद्ध भले ही थम गया हो, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर नई जंग शुरू हो गई है। यहाँ चार बड़े विवादित बिंदु (Deadlocks) हैं:
- ट्रैफिक मैनेजमेंट: अमेरिका चाहता है कि वह ट्रैफिक कंट्रोल करे, लेकिन ईरान इस पर खामोश है।
- कमाई का हिस्सा: टोल टैक्स से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई ईरान, ओमान या अमेरिकी कंपनियों में कैसे बंटेगी?
- अंतरराष्ट्रीय कानून: वैश्विक नियमों के मुताबिक जलडमरूमध्य पर टोल नहीं लगाया जा सकता, लेकिन ईरान इसे अपनी ‘सुरक्षा सेवा’ का शुल्क बता रहा है।
यह सीजफायर सिर्फ एक युद्धविराम नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत है। जहाँ एक तरफ ट्रंप के दावे धरे के धरे रह गए, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने अपनी शर्तों पर शांति समझौता करके अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। क्या यह शांति लंबे समय तक टिकेगी? यह आने वाला वक्त बताएगा।



