क्या अखिलेश का गठबंधन से मोह भंग हो गया है ?

लोकसभा चुनाव अब बेहद कम दिन रह गया है। बीजेपी लगातर एक्टिव है तो दूसरी तरफ विपक्ष भी एक हो गया है लेकिन विपक्षी एकता काफी कमजोर नजर आ रही है क्योंकि ‘इंडिया’ गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है।

दरसअल कांग्रेस को लेकर विपक्षी दलों में एक राय नहीं बन पा रही है। बंगाल में ममता ने साफ कर दिया है कि वो अकेले भी चुनाव लड़ सकती है जबकि अखिलेश यादव और केजरीवाल के साथ-साथ महाराष्ट में सीट शेयरिंग पर तनाव की स्थिति देखने को मिल रही है।

अब अखिलेश यादव का एक बयान सामने आया है जो बता रहा है कि उनका इंडिया गठबंधन से मोह भंग हो गया है। अब सवाल है कि उन्होंने ऐसा क्या कह दिया है जिससे ऐसा कहा जा रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि, पीडीए ही एनडीए का मुकाबला करेगा और जो भाजपा ने पिछले वादे किए हैं कि किसानों की आय दोगुनी होना, युवाओं के लिए रोजगार मिलना, आज कम से कम इन्हें बताना चाहिए कि इन्होंने इतने लोगों को नौकरी दी है। इतने लोगों को रोजग़ार मिल गया है।

सामाजिक न्याय बिना जातीय जनगणना के संभव नहीं है। कुछ लोग सबकुछ पा रहे हैं। आज वाइस चांसलर की नियुक्ति में किन्हें मौका मिल रहा है, कौन है वो लोग जो वाइस चांसलर नियुक्त कर रहे है। सरकार के पास कोई जवाब नहीं है।

अखिलेश यादव के इस बयान में एक बात तो साफ हो गई है कि उनका पूरा फोकस पीडीए पर है न की विपक्षी गठबंधन इंडिया पर, उन्होंने एक बार गठबंधन को लेकर कुछ नहीं कहा है। ऐसे में अटकले लग रही है कि उनका इंडिया गठबंधन से मोह भंग तो नहीं हो गया है।

उत्तर प्रदेश में वो कांग्रेस को चार सीट देने को तैयार है जबकि बाकी सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। अब देखना होगा कि कांग्रेस कैसे सपा से तालमेल बैठाती है।

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